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मध्य प्रदेश: कुछ ऐसी है मंडियों की ज़मीनी हकीक़त! जानें- नए कानून पर क्या बोले किसान

किसानों ने यह भी कहा कि फसल बाहर बेचने की आजादी मिलने से उन्हें फायदा ही होगा, लेकिन इस बात की गारंटी मिलनी चाहिए कि उनका पैसा फंसेगा नहीं.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 12:29 pm, Tue, 29 September 20

नए कृषि कानूनों का कई किसान संगठन और विपक्ष विरोध कर रहा है. विपक्ष लगातार इस बात पर सवाल उठा रहा है कि नए कानूनों से मंडी व्यवस्था खत्म हो जाएगी. विपक्ष ये भी आरोप लगा रहा है कानूनों के ज़रिए एमएसपी को खत्म करने की साजिश रची जा रही है.

ऐसे में TV9 भारतवर्ष ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की करोंद मंडी में किसानों से बातचीत की. इस दौरान किसानों ने नए एक्ट को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रिया दी. खास बात ये है कि छोटे किसानों में नए कानूनों को लेकर जानकारी का अभाव है. ज्यादातर किसानों को इसके बारे में पता नहीं है. हालांकि किसानों का कहना है की मंडी हटनी नहीं चाहिए, अगर मंडी का रोल खत्म हो जाता है तो बिचौलिए और कंपनियां मनमानी करने लगेंगी.

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गारंटी मिले कि पैसा फंसेगा नहीं

किसानों ने यह भी कहा कि फसल बाहर बेचने की आजादी मिलने से उन्हें फायदा ही होगा, लेकिन इस बात की गारंटी मिलनी चाहिए कि उनका पैसा फंसेगा नहीं. बातचीत में किसानों ने कहा कि जब हम गांव में रहते हुए मंडी में आते हैं तो 10 ग्राहक यहां मिल जाते हैं अगर कंपनी या व्यापारी उसके घर पर आएंगे तो मनमाफिक तरीके से माल खरीदने की कोशिश करेंगे. किसानों के मुताबिक जब कानून पूरी तरह से लागू हो जाएगा उसके बाद ही फायदे और नुकसान का सही से पता लग पाएगा.

मंडी कर्मचारियों को नौकरी संकट का डर

पड़ताल में हमें यह पता चला कि ज़मीनी स्तर रहने वाले किसान इन कानूनों को नहीं समझ पा रहे हैं. ऐसे में ये सवाल भी बड़ा कि किसान संगठन इन्हें कितना समझ रहे हैं. जब मंडी के अधिकारियों से इसके बारे में जानना चाहा तो उनका नज़रिया सामने आया. मंडी के कर्मचारी पिछले 4 दिनों से हड़ताल पर हैं, कर्मचारियों का कहना है कि पहले ही मंडी टैक्स कलेक्शन कम होने से उनके वेतन नहीं मिल पा रहा है और अब नया मॉडल एक्ट आने के बाद जब मंडी में टैक्स कलेक्शन और कम होगा तो उनकी नौकरी पर संकट पैदा हो जाएगा.

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मंडी कर्मचारियों ने अपील की कि सरकार को उनके लिए भी कोई रास्ता निकालना चाहिए. मंडी इंस्पेक्टर राधिका प्रसाद गुप्ता ने बातचीत में कहा की किसान को अगर बाहर सामान बेचने की अनुमति मिल जाएगी तो वह मंडी में क्यों आएगा. जब वह मंडी में नहीं आएगा तो मंडी में टैक्स कलेक्शन और कम हो जाएगा. जाहिर है मंडिया खत्म होंगी तो मंडियों में लोगों का रोजगार भी खत्म होगा.