मध्य प्रदेश में अभी नहीं थमा दल-बदल का दौर, उपचुनाव से पहले और भी नेता दे सकते हैं झटका

मध्य प्रदेश विधानसभा के उपचुनाव (MP Assembly by-election) काफी अहम हैं, एक तरफ कमलनाथ (Kamal Nath) की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, तो दूसरी ओर शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) को अपना जनाधार साबित करना है.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 8:18 pm, Thu, 17 September 20

मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा उपचुनाव (MP Assembly by-Elections) से पहले दल-बदल की पटकथाएं लिखने का दौर जारी है. आने वाले कुछ दिनों में कई नेताओं के दल-बदल की संभावनाएं बढ़ चली हैं. राज्य में दल-बदल की शुरुआत मार्च में हुई थी, तब 22 तत्कालीन कांग्रेस विधायकों के पाला बदलने की वजह से ही कमलनाथ (Kamal Nath) के नेतृत्व वाली सरकार गिरी थी और BJP को सरकार बनाने का मौका मिला. इसके बाद कांग्रेस के तीन और विधायकों ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर BJP का हाथ थाम लिया.

राज्य में आने वाले समय में होने वाले विधानसभा के उपचुनाव से पहले BJP और कांग्रेस (Congress) दोनों ही राजनीतिक दल एक दूसरे को बड़ा झटका देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. दोनों ही दलों के नेताओं की असंतुष्टों से बातचीत चल रही है और आने वाले दिनों में दल-बदल की संभावनाओं को भी नहीं नकारा जा सकता है.

‘कहीं गिनती के विधायक ही ना रह जाएं कमलनाथ के साथ’

राज्य सरकार के मंत्री विश्वास सारंग (Vishwas Sarang) कहते हैं कि, “कांग्रेस के कई विधायक BJP में आना चाहते हैं, लेकिन अभी BJP ने उन्हें पार्टी में शामिल करने से रोक रखा है. विधायकों के पार्टी छोड़ने से कांग्रेस की कहीं ऐसी स्थिति न हो जाए कि गिनती के विधायक ही कमलनाथ के साथ रह जाएं.”

वहीं कांग्रेस के प्रवक्ता दुर्गेश शर्मा (Durgesh Sharma) का कहना है कि, “BJP का सारा जोर खरीद-फरोख्त पर है और जो लोग इसमें भरोसा रखते हैं, वे ही कांग्रेस छोड़कर गए हैं. आने वाले चुनाव में जनता बिकाऊ लोगों को सबक सिखाने में पीछे नहीं रहेगी.”

दोनों ही तरफ से आजमाए जा रहे दाव पेंच

राजनीति के जानकारों का मानना है कि आगामी विधानसभा के उपचुनाव काफी अहम हैं, एक तरफ कमलनाथ की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, तो दूसरी ओर शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) और ज्योतिरादित्य सिंधिया को अपना जनाधार साबित करना है. लिहाजा दोनों ही ओर से हर तरह के दाव पेंच आजमाए जा रहे हैं. यही वजह है कि दल-बदल पर दोनों दल जोर लगाने में पीछे नहीं है. इसकी भी वजह है, क्योंकि पार्टियों को लगता है कि दल-बदल से वह अपने वोट बैंक को बढ़ा सकती हैं.