मुंबई की आरे कॉलोनी ‘जंगल’ नहीं, पेड़ काटने पर रोक लगाने से हाई कोर्ट का इनकार

आरे कॉलोनी और संजय गांधी नेशनल पार्क को ‘मुंबई के फेफड़े’ कहा जाता है. आरे में पांच लाख से ज्‍यादा पेड़ हैं. पिछले दो साल से पर्यावरणविद इस फैसले का विरोध कर रहे हैं.

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  • Publish Date - 2:33 pm, Fri, 4 October 19
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बॉम्‍बे हाई कोर्ट ने मुंबई की आरे कॉलोनी को जंगल घोषित करने से इनकार कर दिया है. मेट्रो कार शेड बनाने के लिए यहां के 2,600 पेड़ काटने का प्रस्‍ताव है. इस प्रस्‍ताव का सामाजिक संगठनों से लेकर अभिनेताओं तक ने विरोध किया है. पेड़ काटने के फैसले को चुनौती देने वाली चार याचिकाओं को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया.

चीफ जस्टिस प्रदीप नंदराजोग और जस्टिस भारती डांगरे की बेंच ने कहा, “मामला सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्‍यूनल के आगे लम्बित है. इसलिए, हम समानता के सिद्धांत पर याचिका खारिज कर रहे हैं.”

आरे कॉलोनी और संजय गांधी नेशनल पार्क को ‘मुंबई के फेफड़े’ कहा जाता है. आरे में पांच लाख से ज्‍यादा पेड़ हैं. पिछले दो साल से पर्यावरणविद इस फैसले का विरोध कर रहे हैं.

अमिताभ बच्‍चन और अक्षय कुमार जैसे कई बॉलीवुड सितारों ने मुंबई मेट्रो प्रोजेक्‍ट की तारीफ की थी. इस वजह से उन्‍हें सोशल मीडिया पर आलोचना भी झेलनी पड़ी. पिछले महीने, बच्‍चन के घर के बाहर प्रदर्शन भी हुए थे.

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