उद्धव, आदित्य और सुप्रिया सुले की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, चुनावी हलफनामे में हेर-फेर का आरोप

महाराष्ट्र (Maharashtra) के नेता उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे और सुप्रिया सुले पर चुनावी हलफनामे में कथित तौर पर संपत्ति और देनदारी की गलत जानकारी देने के मामले में जांच बैठ सकती है. सीबीडीटी (CBDT) मामले की जांच कर रही है.

  • TV9 Digital
  • Publish Date - 12:19 pm, Sun, 20 September 20

महाराष्ट्र (Maharashtra) के सीएम उद्धव ठाकरे, उनके बेटे आदित्य ठाकरे और एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. तीनों नेताओं पर चुनावी हलफनामे में गलत जानकारियां देने का आरोप है. इस मामले में चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज की गई है, जिसके बाद चुनाव आयोग ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) को जांच के लिए भेजा है.

उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे (Aditya Thakre) और सुप्रिया सुले पर चुनावी हलफनामे में कथित तौर पर संपत्ति और देनदारी की गलत जानकारी देने के मामले में जांच बैठ सकती है. सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र के तीनों नेता-सुप्रिया सुले, एमएलसी उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे के अलावा गुजरात से विधायक नाथभाई एच पटेल को पोल पैनल द्वारा प्रशासनिक जांच के लिए भेजा गया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग ने इस मामले की जांच सीबीडीटी (CBDT) को सौपी है.

‘चुनावी हलफनामे की जांच सामान्य प्रक्रिया’

सीएम (CM) उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे ने हलफनामे की जांच को सामान्य प्रक्रिया बताया. वहीं शिवसेना के प्रवक्ता और परिवहन मंत्री अनिल परब ने कहा कि चुनाव आयोग और आयकर विभाग आमतौर पर इस तरह की जानकारियां साझा करते हैं, इसलिए यह कोई बड़ी बात नहीं है. अनिल परब एक वकील के तौर पर उद्धव और आदित्य के चुनावी हलफनामे को तैयार करने में मदद की थी.

एनसीपी (NCP) नेता नवाब मलिक ने भी इसे चुनाव आयोग की नियमित प्रक्रिया बताया. उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब हलफनामे में जानकारी की तुलना आयकर रिटर्न के साथ की गई है.

जांच में दोषी होने पर नेताओं पर होगी कार्रवाई

चुनाव आयोग (EC) सीबीडीटी (CBDT) की जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है. अगर सभी नेताओं पर लगे आरोप सही पाए जाते हैं तो सभी पर जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 125 ए के तहत मामला दर्ज किया जाएगा. इसके तहत नेताओं पर जुर्माना लगाया जा सकता है और छह महीने की जेल भी हो सकती है.

साल 2013 में आयकर विभाग (Income Tax Department) ने यह फैसला किया था कि चुनावी हलफनामे में उम्मीदवार की संपत्ति, देनदारियों और शैक्षिक योग्यता की जानकारी को सीबीडीटी द्वारा सत्यापित किया जाएगा.