महाराष्ट्र: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बढ़ेंगी डिप्टी सीएम अजित पवार की मुश्किलें! जांच में जुटा ईडी

महाराष्ट्र के मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी जांच में राज्य के डिप्टी सीएम अजित पवार प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की रडार पर आ सकते हैं. सिंचाई विभाग से जुड़े इन मामलों में अजित पवार (Ajit Pawar) को पहले एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) से क्लीन चिट मिल चुकी है.

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महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र के मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी जांच में राज्य के डिप्टी सीएम अजित पवार (Ajit Pawar) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की रडार पर आ सकते हैं. सिंचाई विभाग से जुड़े इन मामलों में अजित पवार को पहले एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) से क्लीन चिट मिल चुकी है. ईडी ने महाराष्ट्र सिंचाई विभाग से जुड़ी विभिन्न कॉर्पोरेशन्स के खिलाफ जांच शुरू कर दी है.

यह जांच मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों पर है. दरअसल, विदर्भ सिंचाई विकास निगम के अंतर्गत आनेवाले 12 प्रॉजेक्ट्स में अनियमितता पाई गई थी.

मांगी 1999 से 2009 के बीच की जानकारियां

अब ईडी ने विदर्भ सिंचाई विकास निगम, कृष्णा घाटी सिंचाई परियोजना, कोंकण सिंचाई विकास निगम से जुड़ी 1999 से 2009 के बीच की जानकारी मांगी हैं. इसमें बांध प्रॉजेक्ट के टेंडर, अप्रूवल, बिल आदि से जुड़ी जानकारी मांगी गई हैं. बता दें यह मामला पहली बार 2012 में सामने आया था. तब अजित पवार (Ajit Pawar) का नाम भी इसमें उछला क्योंकि वह 1999 से 2009 तक जल संसाधन मंत्री थे. हालांकि, पिछले साल दिसंबर में एंटी करप्शन ब्यूरो ने उन्हें क्लीन चिट दे दी थी.

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बता दें कि कुछ ही दिन पहले मुंबई पुलिस इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) से पवार के साथ-साथ अन्य लोगों को क्लीन चिट मिली है. यह मामला महाराष्ट्र स्टेट कॉर्पोरेटिव बैंक में 25,000 करोड़ की अनियमितताओं से जुड़ा था. इस केस में EOW ने पिछले महीने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी. इसे EOW ने सिविल मामला बताया था, जिसका ईडी ने विरोध भी किया था.

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