भिवंडी हादसा: 10 घंटे मलबे में फंसे शख्स को NDRF ने बचाया, पढ़ें आपबीती

भिवंडी (Bhiwandi) में इमारत ढहने से हुए हादसे में अब तक कुल 41 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो 10 घंटे तक मलबे में दबे रहे और रेस्क्यू टीम (Rescue Team) ने उन्हें जिंदा बाहर निकाल लिया.

Bhiwandi Building Collapse

कुछ दिनों पहले मुंबई के भिवंडी (Bhiwandi) में एक हादसा हुआ. तीन मंजिला इमारत का एक हिस्सा ढह गया जिसमें कई लोगों की मौत हो गई. NDRF की टीम अभी भी मलबे को हटाकर शवों और फंसे लोगों को बाहर निकाल रही है. इस दर्दनाक हादसे में कई लोगों ने अपनी जान गंवा दी और कुछ मलबे में दबे होने के बावजूद जीवित बच गए.

ऐसा ही कुछ चमत्कार हुआ 42 साल के खालिद खान के साथ. सुबह 3:30 बजे जब बिल्डिंग का हिस्सा गिरा तब खालिद खुद को संभाल नहीं पाए. वो घर छोड़कर भागते और अपनी जान बचाते कि इससे पहले वो मलबे के नीचे दब गए.

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खालिद 10 घंटे तक मलबे में दबे रहे, जिसके बाद NDRF की टीम ने उन्हें बड़ी सूझबूझ से बाहर निकाला. 10 घंटे तक मलबे में फंसे खालिद ने अपना एक वीडियो भी बनाया, जिसमें उन्होंने अपनी हालत दिखाई और कहा कि अगर वो जिंदा बच जाते हैं तो अल्लाह के शुक्रगुजार होंगे.

वीडियो में खालिद ने बताया कि कैसे हादसे के दौरान उन्होंने बिस्तर के नीचे छिपकर अपनी जान बचाई. उन्होंने बताया कि वीडियो बनाने से एक-दो घंटा पहले उनका पैर मलबे में ही दबा हुआ था और कैसे उन्होंने खुद को बचाया.

अम्मी को परेशान मत करना

वीडियो में खालिद रोते हुए कहते हैं, ‘अगर मैं नहीं बचा तो अल्ला हाफिज़, मेरे बच्चों अपनी अम्मी को परेशान मत करना, कैसी मुसीबत आ गई, कितने लोग इसमें मर गए होंगे.’ खालिद की किस्मत अच्छी थी जो इतने भयानक हादसे में फंसने के बाद भी वो जीवित बच गए. अस्पताल से लौटने के बाद वो रेस्क्यू टीम की मदद के लिए भी आगे आए हैं.

अब तक हो चुकी हैं 41 मौतें

बता दें कि गुरुवार को हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 41 हो गई. पुलिस ने बताया कि मृतकों में 18 बच्चे भी शामिल हैं. वहीं 25 लोगों को जिंदा मलबे से बाहर निकाला जा चुका है. जिंदा निकाले गए घायलों को भिवंडी और ठाणे के अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है.

मलबे से निकाले जा रहे शव क्षत-विक्षत हैं क्योंकि वो 70 घंटे से अधिक समय से दबे हुए थे. पुलिस अधिकारी ने बताया कि 43 साल पुरानी जिलानी बिल्डिंग सोमवार सुबह ढह गई. इमारत में 40 फ्लैट थे और करीब 150 लोग इसमें रहते थे.

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