‘दादा तबीयत ठीक है न…?’, महाराष्ट्र बीजेपी चीफ चंद्रकांत पाटील पर सामना का लेख

महाराष्ट्र बीजेपी चीफ चंद्रकांत पाटील ने देवेंद्र फडणवीस और संजय राउत की मुलाकात पर बयान दिया था. अब शिवसेना ने मुखपत्र सामना में लेख लिखकर उनपर निशाना साधा (Saamana Attacks Chandrakant Patil) है.

Devendra Fadnavis Sanjay Raut
संजय राउत और देवेंद्र फडणवीस (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस और संजय राउत (Devendra Fadnavis Sanjay Raut Meeting) की मुलाकात को लेकर राजनीतिक बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है. महाराष्ट्र बीजेपी चीफ चंद्रकांत पाटील के बयान के बाद अब शिवसेना ने मुखपत्र सामना में लेख लिखकर उनपर निशाना साधा (Saamana Attacks Chandrakant Patil) है. लिखा गया है कि चंद्रकांत पाटील सपने देख रहे हैं कि शिवसेना बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना लेगी. लेख में आगे लिखा गया है कि शिवसेना की सरकार अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा करेगी, इसमें किसी को शक नहीं होना चाहिए.

दरअसल, पिछले दिनों संजय राउत राज्य के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस से मिले थे. दोनों नेताओं ने बताया कि मुलाकात एक इंटरव्यू के लिए हुई थी जो कि सामना में छपना है. लेकिन मुलाकात को लेकर कयास लगाए जाने लगे कि दोनों पार्टी फिर साथ आ सकती हैं. चंद्रकांत पाटील ने भी ऐसा ही इशारा देते हुए बयान दिया था.

चंद्रकांत पाटील पर शिवसेना का निशाना

अब चंद्रकांत पाटील के बयान पर निशाना साधते हुए शिवसेना ने लिखा, राज्य की राजनीति में ‘वन फाइन मॉर्निंग’ अचानक कुछ होगा, ऐसा भविष्य चंद्रकांत पाटील द्वारा बताए जाने के बाद से कई लोगों के घोड़े सपनों में ही दौड़ने लगे हैं. फाइन मॉर्निंग अर्थात अल-सुबह कुछ तो होगा, ऐसा चंद्रकांत दादा को क्यों लग रहा है, इसकी जांच कर लेनी चाहिए. दादा की तबीयत ठीक है न? उन्हें नींद बराबर आ रही है न? या राजभवन से अचानक किसी फाइन मॉर्निंग को बुलावा आएगा इसलिए वे सो ही नहीं रहे. इस तरह के कई सवाल लोगों के जहन में उठ रहे हैं. चंद्रकांत दादा को ऐसा लग रहा है कि फाइन मॉर्निंग को कुछ तो होगा. यह अच्छे स्वास्थ्य की ‘साइन’ नहीं है.

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यहां फाइन मॉर्निंग से मतलब उस बड़े उलटफेर का है. जब चुनावी नतीजों के बाद देवेंद्र फडणवीस ने NCP नेता अजित पवार के साथ मिलकर सुबह 8 बजे शपथ ले ली थी.

लेख में आगे लिखा गया कि देवेंद्र फडणवीस और संजय राऊत की अचानक भेंट के पश्चात जो माहौल बना, उससे किसी फाइन मॉर्निंग को राजभवन जाकर कुछ किया जा सकता है, ऐसा किसी को लग रहा होगा तो यह उनका भ्रम है. एक तो ऐसी फाइन मॉर्निंग का अचानक प्रयोग भाजपा कर ही चुकी है. लेकिन उस फाइन मॉर्निंग का क्या हुआ, यह अगले 42 घंटों में पता चल ही गया. यह बात सिर्फ देवेंद्र बाबू ही अच्छे से जानते हैं.

सरकार और विरोधी दलों के बीच चर्चा होनी चाहिए: सामना

सामना के लेख में आगे लिखा है कि महाराष्ट्र सहित देश में किसानों में अशांति है. कृषि कानून के विरोध में किसानों ने देश भर में उग्र आंदोलन शुरू किया है. दिल्ली में किसानों ने प्रतीकात्मक ट्रैक्टर जलाकर निषेध व्यक्त किया है. कोरोना का संकट है ही. सरकार और विरोधी दलों में इस मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए और सुबह-सुबह ऐसी चर्चा हुई तो भी कोई हर्जा नहीं है. राज्य में जब समस्याओं का पहाड़ खड़ा हो, उस दौरान राजनीति में अकारण गंदी हवा छोड़कर प्रदूषण निर्माण करना परिपक्वता के लक्षण नहीं है.

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बीजेपी पर सामना ने कसा तंज

लेख आगे कहता है कि महाराष्ट्र की सरकार अगले साढ़े चार साल आराम से चलेगी. सरकार दिन-रात काम कर रही है और सुबह थोड़ी मीठी नींद लेती है. संकट टल जाता है तो मीठी नींद में विघ्न नहीं पड़ता. अगले साढ़े चार साल सुबह का एक भी राजनीतिक मुहूर्त पंचांग में नहीं दिख रहा. ऐसा हम सीना ठोंक कर कह रहे हैं.

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