एक्टर की मौत का मतलब कानून-व्यवस्था फेल होना नहीं, SC ने ठुकराई महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन की अर्जी

चीफ जस्टिस एस. ए. बोबडे ने कहा कि एक एक्टर की मौत होने का मतलब ये नहीं है कि राज्य में कानून-व्यवस्था (Law and Order) फेल हो गई है, आपने जो भी उदाहरण दिए हैं वो मुंबई के हैं.

Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट (FILE)

महाराष्ट्र (Maharashtra) में राष्ट्रपति शासन लागू करने और उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिका दायर की गई थी. कोर्ट ने शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया. कोर्ट ने याचिककर्ता से कहा कि एक नागरिक के तौर पर आप अपनी बात राष्ट्रपति के पास रख सकते हैं. मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट में कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ याचिका दाखिल की गई थी.

मुख्य न्यायधीश ने कहा, “आप कह रहे हैं कि क्योंकि कुछ बॉलीवुड अभिनेताओं की मृत्यु हो गई. राज्य में संवैधानिक नियम का पालन नहीं किया जा रहा है? आपने सिर्फ मुंबई की घटनाओं का जिक्र किया है. आपको पता है कि महाराष्ट्र कितना बड़ा है.”

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याचिका में दी गई ये दलील

याचिका में कहा गया था कि महाराष्ट्र में राज्य मशीनरी फेल हो चुकी है. सत्ताधारी दल अपराधियों को बचाने का काम कर रहा है. याचिका में सुशांत सिंह राजपूत की मौत, कंगना रनौत के घर को तोड़े जाने व धमकी दिए जाने और पूर्व नौसेना अधिकारी पर शिवसैनिकों द्वारा जानलेवा हमले का उदाहरण दिया गया है.

राष्ट्रपति शासन पर प्रकाश आंबेडर का बयान

गौरतलब है कि वंचित बहुजन विकास आघाडी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने हाल ही में दावा किया था कि बिहार चुनाव के बाद महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लग सकता है. प्रकाश आंबेडकर ने सोमवार को दिल्ली में कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र में कभी भी राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है.

उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार के कृषि कानूनों को महाराष्ट्र की महा विकास आघाडी सरकार ने लागू करने से मना कर दिया है. साथ ही केंद्र सरकार के मंदिर खोलने के संदर्भ में जारी गाइडलाइन का भी पालन नहीं किया है.

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