राजस्थान में बेकाबू हुआ कोरोना, अब सरकारी तो क्या निजी अस्पतालों में भी बेड मिलना मुश्किल!

भाजपा सांसद और भाजपा प्रदेश महामंत्री दीया कुमारी (Diya Kumari) ने ट्वीट करके कहा कि जब आज वैश्विक महामारी कोरोना चरम पर है और राजस्थान में चिकित्सा विभाग का पूरा प्रयास मौत और मरीज की संख्या छिपाने पर है. यह बेहद चिंताजनक विषय है.

देशभर में कोरोना (Corona) के मामले पर राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) ने खूब वाहवाही लूटी. पहले चाहे भीलवाड़ा मॉडल हो या फिर बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) सरकार की तारीफ करना. ले​किन अब कोरोना के बढ़ते मामले के बाद सरकार की पोल खुलती नजर आ रही है. राजस्थान की राजधानी जयपुर का तो आलम यह कि यहां सरकारी और निजी अस्प्तालों में आईसीयू बेड मिलना मुश्किल हो रहा है. बेड नहीं मिलने के कारण कई लोगों की जान चली गई. भाजपा विधायक ने बेड नहीं मिलने को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखा है.

राजधानी जयपुर में बेकाबू होते कोरोना के चलते अस्पतालों में इंतजाम हांपने लगा है. चाहे वो सरकारी तंत्र का डेडिकेटेड आरयूएचएस अस्पताल हो या फिर निजी अस्पतालों में किए गए इंतजाम. शहर में बढ़ते कोरोना मामलों के चलते अस्पतालों में गंभीर मरीजों के लिए बेड ही उपलब्ध नहीं है. ऐसे में अधिकांश निजी अस्पतालों का आलम ये है कि वे कोरोना के गंभीर मरीजों को भर्ती करने के लिए असमर्थता जता रहे हैं.

जयपुर में रोजाना 350-400 नए मरीज आ रहे सामने

वैसे तो पूरे देशभर में कोरोना के हालात चिंताजनक हैं, लेकिन राजस्थान में बढ़ते मामलों को देखते हुए स्थिति ज्यादा ठीक नहीं है. खासतौर पर राजधानी के हालात गंभीर हैं, जहां रोजाना कमोबेश 350 से 400 तक कोरोना मरीज सामने आ रहे हैं. हालांकि, अच्छी बात ये है कि इनमें से 70 फीसदी के आसपास ए सिम्टोमेटिक श्रेणी के हैं. लेकिन फिर भी निजी हो या सरकारी अस्पताल, सभी जगहों पर बेड ओवर फ्लो की स्थित में हो गए हैं. कई मरीजों की शिकायतों के बाद हमने जब निजी अस्पतालों की हकीकत जानी हो पता चला कि जयपुर के बड़े अस्पतालों में न तो मरीजों के लिए आईसीयू बेड खाली हैं और न ही वेंटिलेटर की व्यवस्था है.

बेड की कमी पर भाजपा विधायक ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र

जयपुर के सांगानेर से भाजपा विधायक अशोक लाहोटी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर चिंता जाहिर की है. लाहोटी ने पत्र में लिखा कि जयपुर के निजी व सरकारी अस्पतालों में कोरोना के उपचार के लिए कहीं पर बेड उपलब्ध नहीं है. इससे स्थानीय नागरिकों को अपने उपचार को लेकर भयंकर भय व्याप्त है.

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लाहोटी ने आगे लिखा कि मैं स्वंय कोरोना पीड़ित हूं. मैं दर्द समझ सकता हूं, एक कोरोना मरीज का. जब मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती है तो बहुत परेशानी आती है. लाहोटी ने पत्र में आगे लिखा कि कोरोना संक्रमण के कम्युनिटी स्प्रेड की संभावना के चलते राज्य सरकार अविलंब जयपुर के विभिन्न होटलों को रोगिायों के उपचार के लिए अधिग्रहित करे. साथ ही अस्पतालों में प्रचुर मात्र में जीवन रक्षक दवाएं, वेंटिलेटर व आक्सीजन की व्यवस्था करवाई जाए.

कोरेाना के आंकड़े क्यों छुपा रही गहलोत सरकार?

राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार का प्रशासन कोरोना के आंकड़ों को अब छुपाने लगा है. दरअसल, राजस्थान का एक चिकित्सा विभाग दो तरह के आंकड़े जारी कर रहा है. स्थानीय स्तर पर जारी हेल्थ रिपोर्ट के आंकड़े कहते हैं कि राजस्थान प्रदेश में अब तक कोरोना से 1704 लोग की मौत हो चुकी है. जबकि राज्य स्तर पर हेल्थ विभाग कह रहा है कि 1293 मरीज की मौत कोरोना से हुई है.

अब पत्रकारों को 1293 का आंकड़ा ही दिया जा रहा था. बड़ा सवाल ये है कि आखिर 411 मौत का सच क्यों अब तक छिपाया जा रहा था. यही नहीं बीमार मरीजों की संख्या में बड़ा अंतर नजर आ रहा है. स्थानीय स्तर पर जारी हेल्थ आंकड़े में 1 लाख 28 हजार 61 मरीज से ज्यादा मरीज कल तक थे. वहीं, स्टेट रिपोर्ट के अनुसार 1,09473 है यानी कह सकते हैं कि स्टेट रिपोर्ट में 18 हजार 588 संक्रमित कम दिखाए गए हैं.

दीया कुमारी ने ट्वीट कर साधा निशाना

इस मामले पर भाजपा सांसद और भाजपा प्रदेश महामंत्री दीया कुमारी ने ट्वीट करके कहा कि जब आज वैश्विक महामारी कोरोना चरम पर है और राजस्थान में चिकित्सा विभाग का पूरा प्रयास मौत और मरीज की संख्या छिपाने पर है. यह बेहद चिंताजनक विषय है. दीया कुमारी ने लिखा कि यह सारी लापरवाही प्रशासन की नाक के नीचे हो रही है.

वहीं, इस मसले को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गंभीरता से लिया है. सीएम गहलोत ने प्रशासन को आंकड़ों में पूरी पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिये हैं

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