राजस्थान: मंत्रिपद गंवाया पर नहीं छिनेगा सचिन पायलट और दो बागी नेताओं का बंगला

14 जुलाई की वो तारीख थी जब पायलट सहित उनके कुनबे के दोनों नेताओं को मंत्री पद से हाथ धोना पड़ा था. अब मंत्री पद गया तो आशियाने पर संकट नजर आ रहा है.

  • Jitesh Jethanandani
  • Publish Date - 2:35 pm, Mon, 14 September 20

राजस्थान की सियासी गलियारों में इन दिनों एक चर्चा जोरों पर है. दरअसल चर्चा इस बात की है कि राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट व उनके कैंप के मंत्री विश्वेन्द्र सिंह और मंत्री रमेश मीणा को मंत्री पद से हटाये जाने के 2 माह बाद बंगला खाली करना होगा या नहीं.

गौरतलब है कि जब पायलट राजस्थान के सियासी बीहड़ के बागी बने थे. तब पायलट सहित उनके कैंप के रमेश मीणा और विश्वेंद्र सिंह को अपना पद गंवाना पड़ा था. 14 जुलाई की वो तारीख थी जब पायलट सहित उनके कुनबे के दोनों नेताओं को मंत्री पद से हाथ धोना पड़ा था. अब मंत्री पद गया तो आशियाने पर संकट नजर आ रहा है.

दरअसल पुराना नियम यह कहता है कि कि मंत्री पद से हटने के बाद सिर्फ दो महीने तक ही बंगले पर रह सकते हैं अन्यथा यदि बंगला खाली नहीं किया तो 10 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से किराया देना होगा. बता दें कि ये मियाद 14 सितंबर यानी आज पूरी हो रही है.

इसलिए खाली नहीं करना होगा बंगला

लेकिन टीवी 9 भारतवर्ष के पास जो जानकारी मिली उसके अनुसार अब इन नेताओं को बंगला नहीं खाली करना होगा. दरअसल राजस्थान सरकार की ओर से एक संशोधन विधानसभा सदस्यों को निवास सुविधा के संबध में किया गया है. इसके आधार पर अब पायलट, विश्वेन्द्र और रमेश मीणा को बंगला मंत्री पद हटने के बाद भी मिलता रहेगा.

वसुधंरा राजे का बंगला बचाने के लिये सरकार ने न्यायालय में पेश किया शपथ पत्र

दरअसल राजस्थान सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर वसुधंरा राजे को आवंटित बंगला नंबर 13 को खाली कराने के संबंध में जो शपथ पत्र राज्य सरकार की ओर से उच्च न्यायालय में पेश किया गया है और उसमें जो केटेगिरी बतायी गई हैं, उस आधार पर भी तीनों में से किसी का बंगला खाली नहीं कराया जा सकता है, लेकिन फिर अगर बंगला खाली करने की कोई बात सामने आती है, एक बार फिर गहलोत और पायलट गुट आमने-सामने हो सकते है।

गहलोत भी पूर्व में विशेषाधिकार के तहत ले चुके है बड़ा बंगला

राजस्थान में विशेषाधिकार के तहत राज्य सरकारों की ओर से बड़े बंगले आवंटित करने की परंपरा रही है. और वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जब सांसद थे उन्हें भी विशेषाधिकार के तहत राज्य सरकार की ओर से अस्पताल रोड पर बड़ा बंगला आवंटित हुआ था. ऐसे में बंगलों को लेकर राजस्थान में सियासत कोई नई नहीं है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री को बंगले और अन्य सुविधाएं आवंटित करने पर रोके के बाद राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ विधायक और सांसदों सहित केंद्र और राज्य में काबीना मंत्रियों को बड़े बंगले की नीति संसोधन किया गया है.

ऐसे सचिन पायलट जो केंद्र में मंत्री भी रहे हैं, पूर्व मंत्री विश्वेन्द्र सिंह पहले सांसद भी रहे हैं, दूसरी बार मंत्री रहे हैं, रमेश मीणा भी तीसरी बार विधायक और मंत्री रहे हैं तो तीनों की पात्रता है वो बंगला रख सकते है. ऐसे जो शपथ पत्र राज्य सरकार की ओर उच्च न्यायालय में पेश किया गया है. उसके आधार पर तीनों के बंगले पर काबिज रह सकते है.

राजे का बंगला बचाने के लिये राज्य सरकार ने हाइकोर्ट में पेश किया था शपथ पत्र

दरअसल राजस्थान हाइकोर्ट में पिछले दिनों ही राजस्थान सरकार की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री को सुविधाएं देने के मामले में शपथ पत्र पेश कर कहा गया कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुधंरा राजे बतौर विधायक बंगले पर काबिज हैं. ऐसे में अवमानना याचिका में कार्रवाई को समाप्त किया जाए. मुख्य सचिव की ओर से पेश इस शपथ पत्र में कहा गया कि गत 1 अगस्त को राजस्थान विधानसभा सदस्यों को निवासीय सुविधा नियम,1973 में संशोधन किया गया, जिसके तहत जो प्रदेश का मुख्यमंत्री रहा हो, केंद्र का केबिनेट मंत्री रहा हो, राज्य का मंत्री या फिर केंद्र में तीन बार सदस्य रहा हो, कम से कम दो बार सांसद रहा हो को गृह समिति आवास आवंटित कर सकती है.

इस संशोधन के आधार पर फिर 18 अगस्त वसुधंरा राजे को फिर बतौर विधायक बंगला मिला है.दरअसल कह सकते है. जो चर्चा जोरों से सोशल मीडिया और मीडिया में चल रही है,कि नियमों के आधार पर पायलट, विश्वेन्द्र और मीणा को बंगला खाली करना होगा वो गलत है, नियम के आधार पर अगर सरकार चाहे तो बंगला मिल सकता है.