बाबरी विध्वंस पर फैसले से पहले अयोध्या में भाईचारे-सद्भाव का जोर, सबने कहा- खत्म हो विवाद

महंत युगल किशोर कहते हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है कि वह एक काला दिन था, जिसने पूरे देश में दंगे भड़काए, जो भी निर्णय हो हमारी चिंता सिर्फ इतनी है कि सद्भाव बनाए रखा जाना चाहिए.

28 साल पुराने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में फैसला आने से एक दिन पहले, अयोध्यावासी शांत और मूक बने रहे. 11 महीने पहले सुप्रीम कोर्ट का जब फैसला आया था तो शहर को किले की तरह बंद कर दिया गया था. सीबीआई कोर्टरूम की भी सुरक्षा हाई अलर्ट पर कर दी गई थी.

टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर के मुताबिक अयोध्या के डीआईजी दीपक कुमार ने कहा कि अयोध्या भारत में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का सबसे बड़ा उदाहरण है. हमें सीबीआई कोर्ट के फैसले के दिन अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करने की ज़रूरत नहीं है. हालांकि अयोध्या वासी इस उम्मीद में हैं कि दशकों पुराना विवाद इस फैसले के साथ ही बंद होगा और भाईचारे की भावना बनी रहेगी.

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सद्भाव बनाए रखा जाना चाहिए

सरयू कुंज मंदिर के पुजारी महंत युगल किशोर सरन शास्त्री 40 साल के थे जब मस्जिद को ढहाया गया. उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि ये एक काला दिन था, जिसने पूरे देश में दंगे भड़काए, जो भी निर्णय हो हमारी चिंता सिर्फ इतनी है कि सद्भाव बनाए रखा जाना चाहिए. मोहम्मद उमर जो हनुमानगढ़ी मंदिर के बाहर पूजा का सामान बेचता है कहता है कि हम शांति में रह रहे हैं और हम किसी भी तरह के विवाद के लिए कोई निर्णय नहीं चाहते हैं. एक अन्य वादी इकबाल अंसारी कहते हैं कि भारत में कहीं भी पूजा स्थलों पर विवाद नहीं होना चाहिए. दोनों समुदाय शांति से रहें और समाज के कल्याण के लिए साथ आएं.

राम जी सब ठीक करेंगे

राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की देखरेख वाले मणिराम चवनी मंदिर में शांति थी. हालांकि उन्होंने मीडिया से बातचीत करने से इनकार कर दिया. सूत्रों के मुताबिक वो कोर्ट रूप में मौजूद नहीं होंगे. राम नारायण दास एक वृद्ध साधु हैं, जिन्हें भगवान राम में धर्म का पालन करना सबसे ज्यादा पसंद है. वो कहते हैं राम जी सब ठीक करेंगे, सब का भला करेंगे, ढांचा गिराया गया था तब पूरा देश अशांत हो गया था. अब शांति रहनी चहिए. सभी धर्म के लोग जिएं और खाएं.

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एक जेननेक्स्ट यूथ सौरभ विक्रम सिंह ने कहा हां हम 28 साल से फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इसे किसी समुदाय की जीत या हार नहीं माना जाना चाहिए. सद्भाव ज़रूरी है.

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