बाबरी ढांचा विध्वंस: केस-आरोपी-जज-सियासत-असर… जानें एकसाथ सबकुछ

6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) गिरने के बाद फैजाबाद में दो FIR दर्ज कराई गई थी. FIR नंबर 198 लाखों कार सेवकों के खिलाफ थी. वहीं, FIR नंबर 198 संघ परिवार के कार्यकर्ताओं समेत आडवाणी, जोशी, तत्कालीन शिवसेना नेता बाल ठाकरे, उमा भारती अन्य के खिलाफ थी.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 9:46 am, Wed, 30 September 20
Babri Mosque Demolition, Babri Mosque History

यूपी (UP) के अयोध्या (Ayodhya) में 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा ढहाया गया था. इस आपराधिक मामले में 28 साल बाद आज यानी बुधवार को कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा. हाईकोर्ट (Highcourt) के पुराने परिसर में स्थित सीबीआई (CBI) की विशेष अदालत के जज सुरेंद्र कुमार यादव का फैसला सुबह दस बजे के बाद आना है. चलिए इस मामले के हर एक पहलू को विस्तार से समझते हैं.

आरोप: अभियुक्त के खिलाफ मुख्य आरोप एक गंभीर आपराधिक साजिश रचने का है. इससे पहले 2001 में एक ट्रायल कोर्ट ने यह आरोप हटा दिया गया था. साथ ही इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उस फैसले को बरकरार रखा था. लेकिन, 2017 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इसे बहाल कर दिया गया.

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आरोपी: कोर्ट ने इस मामले में 49 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है. इसमें से 17 की मौत हो चुकी है. 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिरने के बाद फैजाबाद में दो FIR दर्ज कराई गई थी. FIR नंबर 198 लाखों कार सेवकों के खिलाफ थी. वहीं, FIR नंबर 198 संघ परिवार के कार्यकर्ताओं समेत आडवाणी, जोशी, तत्कालीन शिवसेना नेता बाल ठाकरे, उमा भारती अन्य के खिलाफ थी.

राजनीतिक प्रभाव: भाजपा के चारों नेताओं आडवाणी, जोशी, भारती और सिंह की राजनीतिक सक्रियता अब जैसे खत्म हो गई है. इनमें से कोई भी संसद का सदस्य नहीं है. साथ ही इनमें से किसी के भी पास पार्टी में कोई कार्यकारी पद नहीं है. वहीं, एक अन्य प्रमुख आरोपी चंपत राय ट्रस्ट के महासचिव हैं. इस ट्रस्ट को अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का काम सौंपा गया है.

जांच: सीबीआई व अभियुक्तों के वकीलों की ओर से करीब आठ सौ पन्ने की लिखित बहस दाखिल की गई है. इससे पहले सीबीआई ने 351 गवाह व करीब 600 से अधिक दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए. माना जा रहा है कि कोर्ट का फैसला भी करीब दो हजार पन्ने का हो सकता है. वहीं, कोर्ट ने लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी व कल्याण सिंह समेत सभी 32 अभियुक्तों को उपस्थित रहने को कहा है. हालांकि कोरोना के चलते इनमें कुछ अभियुक्तों के हाजिर होने की संभावना नहीं है.

न्यायधीश: इस आपराधिक मुकदमे की सुनवाई स्पेशल जज सुरेंद्र कुमार यादव कर रहे हैं. पांच साल पहले उन्हें इस मुकदमे में विशेष न्यायाधीष नियुक्त किया गया था. सुरेंद्र कुमार यादव आज ही रिटायर भी हो जाएंगे. हालांकि इसी मामले के लिए उनको एक साल का इक्स्टेन्शन दिया गया था. उन्होंने 2 सितंबर से फैसला लिखना शुरू किया था. वो कल देर शाम तक स्पेशल अदालत में बैठे रहे.

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