डॉक्टर कफील खान ने जयपुर में सुनाई आपबीती, कहा- यूपी से कुछ दिन रहेंगे दूर, प्रियंका गांधी ने की मदद

डॉक्टर कफील खान ने जयपुर में गुरुवार को कहा, ''मेरे ऊपर आधारहीन और साजिश के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रसुका) लगा दिया गया था. जिसके बाद मुझे बेवजह जेल में रखा गया. मुझे मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित किया गया.''

मथुरा जेल से रिहा हुए यूपी के डॉक्टर कफील खान (Dr. Kafeel Khan) ने गुरुवार को जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान कफील खान ने कहा कि यहां आने के लिए प्रियंका गांधी ने कहा कि हम आपको सुरक्षित जगह देंगे. यूपी सरकार शायद कोई दूसरा केस लगा दे. जीवन को भी खतरा है. इसलिए यूपी से थोड़ा दूर रहेंगे.

कफील खान ने कहा कि सुबह साढ़े 11 बजे मथुरा जेल सुप्रीटेंडेट को कोर्ट का ऑर्डर मिल गया कि रिहा कर दो. डीएम अलीगढ़, उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र के गृहमंत्रालय को ऑर्डर मिल गया कि तुरंत रिहा किया जाए. इसके बावजूद रिहाई नहीं की गई. डीएम कहते रहे कि मैं लखनऊ में बैठे लोगों का ऑर्डर मानूंगा. मैं चीफ जस्टिस का ऑर्डर नहीं मानूंगा. मुझे छोड़ा रात को 11.55 बजे. जब डेडलाइन खत्म होने वाली थी.

प्रियंका गांधी ने की मदद

कफील खान ने कहा, ”राजस्थान, मथुरा के बॉर्डर से लगा हुआ है. हम लोग इसलिए भरतपुर में एंट्री कर गए. प्रियंका जी ने भी मदद की है. कांग्रेस की यहां सरकार है. इसलिए हम यहां सुरक्षित रह सकते हैं. परिवार को भी ऐसा ही लगा. पिछले साढ़े सात महीने मानसिक शोषण हुआ. वहीं, फिजिकली भी टॉर्चर किया. यही कहा जाता था कि सरकार के खिलाफ मत बोलो. इसलिए चाहता था कि ऐसी जगह पर रहूं, जहां परिवार के साथ वक्त बिता सकूं.”

जनवरी में ही कोरोना के खतरे के बारे में बताया था

डॉ कफील खान ने कहा कि 27 जनवरी 2020 को जब कोरोना का देश में एक भी केस नहीं था. उस वक्त मैंने वीडियो बनाया था. उसमें सबसे आग्रह किया कि कैसे कोरोना से बचना है. कैसे हाथ साफ करने हैं. मुझे 29 जनवरी को गिरफ्तार कर लिया गया. मैंने पीएम मोदी को भी मेडिकल व्यवस्था पर पत्र लिखा. आज ये हालत है कि हम ब्राजील को मात देने जा रहे हैं. आज कहना चाहता हूं कि करीब 1 करोड़ लोग इससे इफेक्ट होंगे.

नौकरी ज्वॉइन करने के लिए मुख्यमंत्री से करूंगा गुजारिश

कफील खान ने कहा कि अब मेरा प्रयास रहेगा कि अपने प्रदेश के मुख्यमंत्री जी से गुजारिश करके फिर से अपनी नौकरी ज्वॉइन कर सकूं. इसलिए लेटर लिखूंगा. 10 साल का मेरा जो एक्सपीरियंस है, इसलिए शायद कोरोना से लड़ने के लिए अपना योगदान दे सकूं.

मैं अपने आप को वॉलंटियर प्रेजेंट करूंगा. जो इंस्टीट्यूट वैक्सीन बना रहे हैं, मेरे ऊपर रिसर्च कर सकते हैं. वैक्सीन दे सकते हैं. कफील ने कहा कि मेरे परिवार को लगता है कि मुझे फिर से किसी केस में फंसाया जा सकता है. जब बिहार, असम और केरल जाऊंगा तो भी सुरक्षित रहूंगा.

कफील ने कहा कि मेरे ऊपर आधारहीन और साजिश के तहत रसुका लगा दिया गया था. जिसकी बाद मुझे बेवजह जेल में रखा गया. मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित किया गया. वहीं, इलाहबाद कोर्ट ने साफ लहजे में कहा कि डीएम अलीगढ़ ने भारतीय कानून व्यवस्था का दुरुपयोग किया.

भड़काऊ भाषण के आरोप में गिरफ्तार

बता दें कि मंगलवार को ही कफील खान जेल से रिहा हुए हैं. इनपर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में 13 दिसंबर 2019 को भड़काऊ भाषण देने का आरोप था. यूपी पुलिस ने उन्हें जनवरी में मुंबई से गिरफ्तार किया था. बाद में अलीगढ़ कलेक्टर ने नफरत फैलाने के आरोप में उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई की. फरवरी में उन्हें फिर गिरफ्तार कर मथुरा जेल भेज दिया गया. इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर उन्हें रिहा किया गया.

ऑक्सीजन कांड के बाद चर्चा में आए थे

डॉ. कफील गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 2017 में ऑक्सीजन की कमी से कुछ ही दिनों में 60 बच्चों की मौत की घटना को लेकर चर्चा में आए थे. आपात स्थिति में ऑक्सीजन सिलेंडरों की व्यवस्था कर बच्चों की जान बचाने को लेकर डॉ. कफील की प्रशंसा हुई थी. बाद में 9 अन्य डॉक्टरों और कर्मचारियों के साथ उन पर कार्रवाई हुई. विभागीय जांच में डॉ. कफील को क्लीनचिट दी गई थी.

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