कांग्रेस का हाथ थामकर राजनीति में उतर सकते हैं कफील खान, परिवार के सदस्‍य ने जताई संभावना

सूत्रों की मानें तो हाल ही में मथुरा जेल से रिहा हुए डॉ कफ़ील खान (Dr Kafeel Khan) राजनीति में शामिल हो सकते हैं. परिवार के एक सदस्य का अनुमान है कि वो कांग्रेस (Congress) का हाथ थामेंगे.

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गोरखपुर में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई बच्चों की मौत के बाद सुर्खियों में आए डॉ कफ़ील खान (Dr Kafeel Khan) हाल ही में मथुरा जेल से रिहा हुए हैं. अब खबर है कि वो राजनीति में हाथ आज़मा सकते हैं. विपक्षी पार्टियां कफ़ील खान से संपर्क करने की कोशिश कर रही हैं. हालांकि उन्होंने कांग्रेस के प्रति अपना रुझान दिखाया है.

कफ़ील खान ने कहा कि, ‘मुश्किल समय में प्रियंका गांधी वाड्रा ने मेरा समर्थन किया. मथुरा जेल से रिहाई के बाद उन्होंने मुझसे फोन करके बातचीत की.’ कफ़ील खान की जेल से रिहाई के वक़्त पूर्व कांग्रेस विधायक प्रदीप माथुर वहां मौजूद थे. उन्होंने कहा, ‘वरिष्ठ पार्टी नेताओं के दिशानिर्देश पर मैं कफ़ील की रिहाई की औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए लगातार मथुरा और अलीगढ़ जिला प्रशासन से संपर्क में था.’

कांग्रेस नेता का कहना है कि, ‘प्रियंका गांधी ने सिर्फ मानवता के लिए उनके समर्थन और योगी सरकार के निर्दोष लोगों पर अत्याचार के विरोध में अपनी आवाज़ बुलंद की. अब ये कफ़ील पर निर्भर करता है कि वो कांग्रेस के साथ काम करना चाहते हैं या नहीं.’

डॉ कफ़ील खान ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वो बिहार, असम, केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित करेंगे. एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि, ‘कफ़ील के पास 2022 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी का मुस्लिम चेहरा बनने की काबिलियत है, जिसमें पार्टी अपनी खोई जमीन वापस पाने के लिए काम कर रही है.’ उन्होंने कहा, ‘राज्य सरकार के खिलाफ उनकी लड़ाई ने उत्तरप्रदेश और अन्य राज्यों में समुदाय के लोगों के बीच बड़ी संख्या में समर्थन हासिल किया है.’

कफ़ील के परिवार के एक सदस्य का कहना है कि उन्होंने बीते तीन वर्ष में काफी कुछ झेला है और शायद अब उनके पास राजनीति में शामिल होने के सिवाय और कोई उपाय नहीं बचा है. परिवार के सदस्य ने कहा कि कई पार्टियों की ओर से ऑफर हैं लेकिन यह निर्णय कफ़ील को करना है कि वो किसमें शामिल होना चाहते हैं. वो कांग्रेस हो सकती है.

बता दें कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में एंटी सीएए प्रोटेस्ट में हिस्सा लेते हुए कफ़ील पर कथित भड़काऊ भाषण देने के लिए रासुका के तहत कार्यवाई की गई थी. इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के बाद उन पर से रासुका को हटाया गया और उन्हें तत्काल जेल से रिहा कर दिया गया.

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