मथुरा जेल में बंद PFI के सदस्यों से आज पूछताछ करेगी ED, दंगों के लिए फंडिंग का मामला

इससे पहले हाथरस कांड के बहाने दंगों की साजिश रचने के मामले में मथुरा से गिरफ्तार पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के चार सदस्यों को CJM कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था.

Mathura PFI
हाथरस जा रहे चार संदिग्धों को पकड़ा गया (File Photo)

केंद्रीय जांच एजेंसी ED मुख्यालय में कार्यरत चार अधिकारियों की टीम मथुरा पहुंची है. दिल्ली से गई टीम मथुरा जेल में बंद PFI और उसकी सहयोगी संस्था CFI के संदिग्ध आरोपियों से पूछताछ करेगी. ED की टीम के पास कोर्ट के ऑर्डर का एक दस्तावेज़ भी है. कल मथुरा स्थित स्थानीय कोर्ट से ईडी को इन सदस्यों से पूछताछ की मंज़ूरी मिली थी.

इससे पहले हाथरस कांड के बहाने दंगों की साजिश रचने के मामले में मथुरा से गिरफ्तार पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के चार सदस्यों को CJM कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. इन लोगों को पुलिस ने 5 अक्टूबर को मथुरा में गिरफ्तार किया था. इनके खिलाफ हाथरस में शांति भंग करने, धार्मिक उन्माद फैलाने और दंगा भड़काने की साजिश रचने, देशद्रोह, विदेशी फंडिंग से देश विरोधी गतिविधियों का संचालन करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है.

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PFI को मिली फंडिंग के मिले थे सबूत

हाथरस कांड (Hathras Case) के बाद उत्तर प्रदेश में दंगा भड़काने के लिए पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) को मिली फंडिंग के सबूत मिले थे. शुरुआती जांच में प्रवर्तन निदेशालय ने पाया है कि पीएफआई के पास फंडिंग का बड़ा हिस्सा विदेश से भी आया था. मिली जानकारी के मुताबिक, यूपी को दंगों की आग में झोंकने के लिए 50 करोड़ रुपये मॉरिशस से आए थे.

ईडी की जांच में पाया गया है कि कुल 100 करोड़ रुपये की फंडिंग हुई थी. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में कई विदेशी अकाउंट की जानकारी मिली. अब सभी अकाउंट ED और जांच एजेंसी के रडार पर हैं.

यूपी सरकार ने कहा था- दंगा भड़काने की थी साजिश

बता दें कि इससे पहले यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया था. बताया था कि सरकार भी सीबीआई जांच चाहती है, जिससे सच सामने आए. यह भी कहा गया था कि इस मामले को जातीय रंग देकर यूपी को जलाने की साजिश थी. दावा किया गया था कि जस्टिस फार हाथरस नाम से एक वेबसाइट बनी थी. जिसमें फर्जी आईडी के जरिए हजारों लोग जोड़े गए थे.

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