हाथरस केस: आधी रात को जली चिता, सड़ा सिस्टम, बेटी जबरन ‘विदा’

हाथरस (Hathras Case) पीड़िता की आज दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल की शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी सामने आई, जिसमें बताया गया कि लड़की के पूरे शरीर में लकवा मार गया था और गर्दन के नीचे चोंटे थीं.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 12:05 am, Thu, 1 October 20
एफएसएल रिपोर्ट अविश्वसनीय (FILE Photo)

दरिंदगी की शिकार हुई हाथरस (Hathras) की 19 साल की लड़की की मौत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) से बात की और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की. इस बात की जानकारी खुद योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट करके दी है.

योगी ने अपने ट्वीट में लिखा, “आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने हाथरस की घटना पर बातचीत की है और कहा है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.” इसके बाद सीएम योगी ने हाथरस घटना के दोषियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाना का निर्देश दिया.

योगी आदित्यनाथ ने पीड़ित परिवार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात भी की और इस घटना की जांच SIT को सौंप दी. इस तीन सदस्यीय टीम की अगुवाई गृह सचिव भगवान स्वरूप कर रहे हैं. इस टीम में दलित और महिला अधिकारी भी शामिल हैं. SIT अपनी रिपोर्ट 7 दिनों में सरकार को सौंपेगी.

सियासी बवाल भी शुरू

वहीं इस पूरे मामले पर सियासी बवाल मचा है. कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और दूसरे विपक्षी नेता बीजेपी को घेरने की कोशिश कर रहे हैं. कुछ तो इसी बहाने राजनीतिक रोटी भी सेंकने की कोशिश कर रहे हैं.

इसी कड़ी में हाथरस में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकाला. तालाब चौराहा इलाके में दुकानें बंद करवाने लगे. पुलिस ने इन्हें रोकने की कोशिश की, तो इन्होंने एक बाइक में आग लगा दी, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसूगैस के गोले भी छोड़े.

सवाल उठता है कि आखिर इतने गंभीर मामले में हंगामा करने से क्या हासिल होगा? क्या मोमबत्ती जलाकर? गाड़ी या बाइक जलाकर और लॉ एंड ऑर्डर बिगाड़कर किसी को न्याय दिलाया जा सकता है? या फिर सिस्टम के जरिए रेप या गैंगरेप के दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाकर दरिंदों में खौफ पैदा किया जाए. ये सही तरीका होगा.

पीड़िता को नसीब नहीं हुई अपनों के हाथों से आग

इधर दम तोड़ चुकी पीड़िता को अपनों की आग तक नसीब नहीं हुई. रात करीब 12.30 बजे कथित गैंगरेप पीड़िता का शव दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से करीब 200 किमी दूर हाथरस के गांव में पहुंचा, तो परिजनों ने पुलिस के सामने बिटिया का शव देखने की इच्छा जताई. बेटी का शव घर लेजाने की गुहार लगाई और जिद मारकर मां, भाई समेत कई लोग एंबुलेंस के आगे बैठ गए.

हाथरस में दरिंदगी की शिकार हुई लड़की का शव करीब दो घंटे तक घर से एक किलोमीटर दूर एंबुलेंस में रखा रहा. दर्जनों लोग पुलिस के सामने परंपरा के मुताबिक सुबह अंतिम संस्कार करने की मिन्नतें करते रहे. बीच-बीच में हंगामा भी होता रहा, लेकिन पुलिस ने पत्रकारों और परिजनों को दूर रखने के लिए मानव श्रृंखला बना ली और अफसरों ने परिजनों को समझाने बुझाने का मोर्चा संभाला.

आखिरकार पुलिस ने परिजनों को एंबुलेंस के आसपास से जबरन हटाया और एंबुलेंस आगे बढ़ गई. दो लोगों ने शव को उतारकर चिता पर रखा और रात करीब ढाई बजे दरिंदगी की शिकार हुई 19 साल की लड़की की चिता को आग के हवाले कर दिया गया.

पुलिस पर लगे महिलाओं की पिटाई के आरोप

आरोप तो यहां तक हैं कि एंबुलेंस के पास से हटाने के दौरान पुलिस ने महिलाओं की भी पिटाई की, जिसके बाद दहशत के मारे परिजनों ने खुद को घरों के अंदर ताला मारकर बंद कर लिया. जबकि हाथरस के डीएम कह रहे हैं कि पुलिस ने जबरन लड़की का दाह संस्कार नहीं किया, बल्कि परिवारवालों की रजामंदी और मौजूदगी में उसका अंतिम संस्कार हुआ.

पीड़िता के मां-बाप कहना है कि आखिरी बार बिटिया का चेहरा तक नहीं देखा. पूरा परिवार इंसाफ मांग रहा है, लेकिन न्याय मांगे तो किससे? पुलिस प्रशासन ने तो बेटी को अपनों के हाथों की मुखाग्नि तक नसीब नहीं होने दी, लेकिन इस मुद्दे को सियासी सूखे की मार झेल रहे विपक्षियों ने रोटी सेंकनी शुरू कर दी.

“लड़की के पूरे शरीर में लकवा मार गया था”

इधर हाथरस पीड़िता की आज दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल की शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी सामने आई, जिसमें बताया गया कि लड़की के पूरे शरीर में लकवा मार गया था और गर्दन के नीचे चोंटे थीं, लेकिन इस रिपोर्ट में ये जिक्र नहीं है कि लड़की की जीभ कटी थी या नहीं और ये भी नहीं बताया गया कि उसके साथ बलात्कार हुआ था या नहीं.

हालांकि, हाथरस पुलिस भी पहले की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कह रही है कि लड़की के साथ दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई है, जबकि परिजन गैंगरेप का आरोप लगा चुके हैं और पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया है.

दरअसल ये मुद्दा इसलिए बड़ा हो गया क्योंकि इसमें गैंगरेप और जीभ काटने जैसे जघन्य अपराध जुड़े हैं, जिसने पूरे देश को निर्भया केस की याद दिला दी. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के डाटा के मुताबिक…

  • भारत में साल 2018 में रेप के 33 हजार से ज्यादा मामले सामने आए. इसका मतलब ये है कि देश में हर रोज 91 से ज्यादा और हर घंटे करीब 4 रेप केस दर्ज किए गए .
  • इसके अलावा साल 2018 में ही छेड़छाड़ की करीब 90 हजार शिकायतें लिखी गईं.
  • बलात्कार की कोशिश के करीब 4100 केस दर्ज किए गए.
  • वहीं राज्यों के हिसाब से देखें, तो मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा 5433. राजस्थान में 4335 और उत्तर प्रदेश में 3946 रेप केस दर्ज किए गए.

अब सवाल उठता है कि निर्भया केस के 8 साल बाद भी. निर्भया कानून बन जाने के 7 साल बाद भी और निर्भया के दोषियों को फांसी की सजा के बाद भी भारत में रेप और गैंगरेप के मामले रुक क्यों नहीं रहे हैं? आखिर इसका जिम्मेदार कौन है? क्या इसके लिए पुलिस जिम्मेदार है? या न्याय व्यवस्था या फिर समाज? पहले बात समाज की करते हैं.

  • साल 2018 में रेप के कुल मामलों में 94 फीसदी आरोपी या दोषी परिचित थे.
  • 48 फीसदी फैमिली फ्रेंड, पड़ोसी, साथ काम करने वाले कर्मचारी या दूसरे नजदीकी.
  • 8 फीसदी से ज्यादा मामलों में दोषी परिवार के लोग थे.
  • 6% रेप केस अजनबियों के नाम दर्ज थे.

इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी ने भी कहा था कि हम और आप सभी लोग घर-परिवार की लड़कियों को तो समझाते हैं, लेकिन लड़कों को सीख नहीं देते. ये तो हुई सामाजिक जिम्मेदारी की बात. अब बात करते हैं कि अगली जिम्मेदारी किसकी?

दरअसल इस मामले में पुलिस और कोर्ट को मिलकर काम करने की जरूरत है. पुलिस की जिम्मेदारी ये है कि जब भी ऐसे मामलों में पीड़ित पक्ष बात करे तो पुलिस संजीदगी से मामलों को सुने, समझे और सुलझाए. हालांकि, हाथरस के केस में पुलिस पर लापरवाही और दबंगई के आरोप लग रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए.

पुलिस को चाहिए कि जल्द से जल्द मामले को अदालत तक पहुंचाए और वहां तेजी से ट्रायल चले, क्योंकि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, कोलकाता की एक स्टडी के मुताबिक, देश में एक वादी को फैसले के लिए 122 हफ्ते यानी करीब ढाई साल इंतजार करना होता है.

तीन करोड़ 80 लाख केस कर रहे फैसलों का इंतजार

नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड के मुताबिक, 10 साल से देश की अदालतों में करीब 37 लाख केस पेंडिंग हैं. 20 साल से 6 लाख 60 हजार केस और तीन दशक से करीब 1 लाख 31 हजार केस कोर्ट में पेंडिंग हैं. कुल मिलाकर देश भर की अदालतों में 3 करोड़ 80 लाख केस फैसले का इंतजार कर रहे हैं.

निर्भया केस की भी बात करें, तो उसके फैसले के लिए भी देश को 16 दिसंबर 2012 से 20 मार्च 2020 यानी 2651 दिन तक इंतजार करना पड़ा था. इसलिए जरूरत इस बात की है कि ऐसे केस का स्पीड ट्रायल ही हो. लोअर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में सुनवाई की मियाद तय हो और जल्द से जल्द दोषियों को कड़ी सजा सुनाई जाए. दरिंदगी करने वालों के सामने हमेशा खौफ नाचता रहे और देश की बहन, बेटियों का डर खत्म हो सके.