उत्तर प्रदेश: लैब टेक्नीशियन की हत्या कर शव नदी में फेंका, आरोपी गिरफ्तार

बर्रा (Bara) पांच निवासी लैब टेक्नीशियन (Lab Technician) संजीत यादव 22 जून की देर शाम से लापता थे. दो दिन तक संजीत का कोई सुराग न लगने पर परिजनों ने अपहरण की आशंका जताई थी.

कानपुर के बर्रा के लैब टेक्नीशियन संजीत यादव (Sanjeet Yadav) के अपहरण के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी. पुलिस ने 31वें दिन इस अपरहण का खुलासा करते हुए 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन अभी तक शव नहीं मिला है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बोले- अपराधियों की कोई जात नहीं होती

इस मामले में सीएम योगी की बड़ी कार्रवाई करते हुए, कई अधिकारियों पर गाज गिरी है. योगी ने मामेले की निंदा करते हुए ट्वीट किया है. उन्होंने लिखा, “अपराधियों की कोई जात नहीं होती है, उनका कोई धर्म नहीं होता.

 

पुलिस कर रही है आरोपियों से पूछताछ

एसएसपी दिनेश कुमार ने बताया कि आरोपियों ने 26 या 27 जून को ही संजीत की हत्या कर शव पांडु नदी में फेंक दिया था, शव की तलाश के लिए टीमें लगाई गई हैं.

पुलिस की हिरासत में कल्याणपुर की महिला, उसके रिश्तेदार और सचेंडी कैंधा के दो युवकों से पूछताछ जारी है. आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उनके साथ घटना में संजीत के साथ काम करने वाला पनकी निवासी एक अन्य युवक भी शामिल था. उसकी लोकेशन नोएडा मिलने पर पुलिस टीम भेजी गई है.

क्या है पूरा मामला

बर्रा पांच निवासी लैब टेक्नीशियन (Lab Technician) संजीत यादव 22 जून की देर शाम से लापता थे. दो दिन तक संजीत का कोई सुराग न लगने पर परिजनों ने अपहरण की आशंका जताई थी. परिजनों ने आरोप लगाया था कि बेटी रुचि से शादी तोड़ने पर बर्रा विश्व बैंक कॉलोनी के राहुल यादव ने बेटे का अपहरण किया. इस दौरान पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली.

29 जून को मांगी गई फिरौती की रकम

अपहरणकर्ताओं ने 29 जून को 30 लाख रुपए की फिरौती के लिए पहली बार कॉल की. आरोप है कि परिवार के जानकारी देने के बाद भी पुलिस का रवैया ढुलमुल रहा. 11 जुलाई तक अपहरणकर्ताओं ने परिजनों को फिरौती के लिए 21 कॉल की. परिजनों का कहना है कि पुलिस निगरानी में 13 जुलाई को फिरौती की रकम गुजैनी पुल से फेंक दी गई, जिसे लेकर अपहर्ता फरार हो गए. मामला तूल पकड़ने पर अगले दिन एसएसपी ने इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया था.

अपहरण में किसी करीबी का भी हाथ

अपहरण में संजीत का एक करीबी भी शामिल था. उसका संजीत के घर आना-जाना था और उसे मालूम था कि उसके यहां बहन की शादी टूटी है और घर वालों ने पैसा और जेवर रखे हुए है. उसे यहां तक पता था कि परिजनों के बैंक खाते में दस लाख जमा है. फिरौती की कॉल आने पर परिजनों ने अपहरणकर्ताओं को 30 लाख जुटाकर दिए.

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