यूपीएसआई-2016 के मामले में हाईकोर्ट के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती, 9 अक्टूबर को अगली सुनवाई

याचिकाकर्ताओं ने यूपीएसआई-2016 (UPSI) भर्ती के रिजल्ट को रद्द किए जाने के इलाहाबाद हाईकोर्ट (High Court) के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती बोर्ड और ट्रेनिंग कर रहे उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है.

यूपीएसआई-2016 (UPSI) भर्ती मामले में आज सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में होने वाली सुनवाई टल गई है. अब यह सुनवाई 9 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे होगी. याचिकाकर्ताओं ने यूपीएसआई-2016 भर्ती के रिजल्ट को रद्द किए जाने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती बोर्ड और ट्रेनिंग कर रहे उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट (High Court) ने अपने आदेश में कहा था कि 11 सितंबर 2019 को भर्ती में 50 प्रतिशत हासिल नंबरों को योग्यता मानदंड माना जाएगा और जिन लोगों ने 50 प्रतिशत या उससे ज्यादा नंबर हासिल किए हैं, उनकी मेरिट लिस्ट बनाने में नॉर्मलाइजेशन रूल लागू किया जाएगा.

पेपर लीक होने के बाद रद्द हुई परीक्षा

दरोगा भर्ती प्रक्रिया समाजवादी पार्टी (SP) की सरकार में शुरू हुई थी. मार्च 2017 में बीजेपी सत्ता में आई. 21,25 और 26 जुलाई को दरोगा परीक्षा भर्ती की ऑनलाइन परीक्षा होनी थी. 21 जुलाई को ऑनलाइन पेपर हुआ, उसके थोड़ी देर बाद ही पेपर लीक होने की खबर सामने आई. दरोगा भर्ती के आवेदकों ने सीएम योगी और तत्कालीन यूपी के डीजीपी सुलखान सिंग को ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी. इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रोन्नति बोर्ड ने उस परीक्षा को रद्द कर दिया, और 25 और 26 जुलाई को होने वाली परीक्षा भी रद्द कर दी गई. दरोगा भर्ती की नई परीक्षा 12 दिसंबर से 23 दिसंबर 2017 के बीच हुई. जून 2018 में आवेदकों के दस्तावेज चेक किए गए, इसके साथ ही जुलाई 2018 में उन्हें फिजिकल के लिए 28 मिनट का समय दिया गया.

रिजल्ट आने के बाद हाईकोर्ट पहुंचा मामला

28 फरवरी 2019 को दरोगा भर्ती परीक्षा (UPSI) का फाइनल रिजल्ट आया, जिसमें 2707 पदों में से 2118 लोगों को ही सलेक्ट किया गया था. वहीं महिलाओं के लिए 600 सीटों में से 305 को ही सलेक्ट किया गया. लिखित परीक्षा पास करने के बाद जो लोग फिजिकल परीक्षा में जगह नहीं बना पाए, उन लोगों ने हाईकोर्ट का रुख किया. इन लोगों ने हाईकोर्ट में कहा कि वह इसलिए फिजिकल में पास नहीं हुए क्यों कि लिखित परीक्षा में उनके 50 प्रतिशत से कम नंबर थे. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से एक महीने के भीतर जवाब मांगा और कहा कि अंतिम फैसला कोर्ट करेगा.

इलाहाबाद हाईकोर्ट (High Court) की लखनऊ बेंट ने 30 मार्च 2019 को भर्ती में सलेक्ट हुए लोगों की नियुक्ति पर रोक लगा दी, वहीं 29 मई 2019 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जज गोविंद माथुर और जज जसप्रीत सिंह ने कोर्ट के आदेश को बदलते हुए नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश दिया. 11 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट का अंतिम फैसला आया जिसमें पूरे रिजल्ट को ही रद्द करने का आदेश दिया गया. अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है.

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