यूपी: 24 घंटे में 2 पुलिसकर्मियों ने सरकारी रिवॉल्‍वर से खुद को गोली मारकर आत्‍महत्‍या की

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, राज्य में इस साल निरीक्षक से कॉन्‍स्‍टेबल पद तक के कम से कम 19 पुलिसकर्मी आत्महत्या कर चुके हैं.

  • TV9.com
  • Publish Date - 5:41 pm, Tue, 12 November 19

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 24 घंटे के अंदर दो पुलिसकर्मियों ने आत्‍महत्‍या कर ली. सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के उप निरीक्षक रमेश चौधरी (40) बहराइच जिला में भारत-नेपाल सीमा पर तैनात थे. उन्होंने सोमवार को सरकारी राइफल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली.

रमेश चौधरी को एसएसबी की 70वीं बटालियन के कटरनिया घाट चौकी पर 15 दिन पहले तैनात किया गया था. सहायक पुलिस अधीक्षक (एएसपी) रवींद्र सिंह ने कहा कि रमेश चौधरी को मिहीपुरवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

वहीं, बुलंदशहर में तैनात उत्तर प्रदेश पुलिस के कांस्टेबल शेर सिंह धामा ने भी सोमवार को ही अपने घर पर सरकारी रिवॉल्वर से गोली मारकर आत्महत्या कर ली. धामा बागपत जिला के खेकड़ा गांव के निवासी थे।

मौके पर कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है. उन्‍होंने आत्‍महत्‍या क्‍यों की, इस बारे में अब तक कुछ पता नहीं चल सका है. पुलिस के अनुसार, 2011 बैच के कॉन्‍स्‍टेबल धामा रविवार रात अपने भाई दीपू के जन्मदिन की पार्टी से लौटकर सोने चले गए. दीपू भी उस वक्‍त घर में ही सो रहा था.

बुलंदशहर के एसपी (नगर) अतुल श्रीवास्तव ने कहा कि आत्महत्या का कारण अभी पता नहीं चला है, लेकिन प्राथमिक नजर में लगता है कि वे घरेलू विवाद के चलते तनाव में थे।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, राज्य में इस साल निरीक्षक से कॉन्‍स्‍टेबल पद तक के कम से कम 19 पुलिसकर्मी आत्महत्या कर चुके हैं, जिससे ड्यूटी के दौरान उनपर होने वाले दवाब और तनाव पर अपने आप ध्यान जाता है.

उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ओपी सिंह ने हाल ही में कहा था कि विभाग में आत्महत्याओं के बढ़ते मामले चिंता का विषय हैं.

उन्होंने कहा, “परिवार के मुखिया के तौर पर मैं पुलिसकर्मियों द्वारा आत्महत्या करने की घटनाओं के बारे में जानकर बहुत दुखी हूं.” उन्होंने कहा था, “ज्यादातर मामलों में आत्महत्या जैसा कदम उठाने के पीछे निजी मामला होता है. उत्तर प्रदेश एक बड़ा बल है और हमने अपने पुलिसकर्मियों की भलाई के लिए उनके प्रमोशन, आवास और काम करने के माहौल के संबंध में पिछले दो साल में कई कदम उठाए हैं.”

इन मामलों पर बढ़ती चिंताओं को देखते हुए विभाग पेशेवर मनोवैज्ञानिकों से भी सेवाएं लेने की योजना बना रही है. ये मनोवैज्ञानिक यह जांच करेंगे कि क्या पुलिसकर्मी तनाव या दवाब से गुजर रहे हैं या नहींऔर इसके बाद उन्हें जरूरी उपचार दिया जाएगा.