कानपुर: लैब टेक्नीशियन संजीत यादव किडनैपिंग-मर्डर मामले में CBI जांच कराएगी UP सरकार

संजीत यादव (Sanjeet Yadav) की हत्या को क़रीब एक महीना बीत चुका है. गिरफ्तार तीन आरोपी पुलिस कस्टडी में हैं, ये बार-बार अपने बयान बदल रहे हैं, वहीं हत्या का एक आरोपी कोरोन पॉजिटिव भी है.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 1:12 pm, Sun, 2 August 20

कानपुर के लैब टैक्नीशियन संजीत यादव (Sanjeet Yadav)के अपहरण और हत्या के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच कराने का फैसला किया है. संजीत कानपुर के बर्रा इलाके का रहने वाला था, कुछ दिन पहले बदमाशों ने उसका अपहरण करके हत्या को अंजाम दिया था.

मामले में पुलिसकर्मियों पर लापरवाही के आरोप लगे, जिसके बाद योगी सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई. प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, मायावती ने मामले को लेकर योगी सरकार को पर तीखे हमले किए. मामले में अधिकारियों की लापरवाही को लेकर योगी सरकार ने एक्शन लेते हुए कई को सस्पेंड कर दिया जिसमें एसपी अपर्णा, एसओ रंजीत राय भी शामिल हैं.

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संजीत यादव (Sanjeet Yadav) की हत्या को क़रीब एक महीना बीत चुका है. गिरफ्तार तीन आरोपी पुलिस कस्टडी में हैं, ये बार-बार अपने बयान बदल रहे हैं, वहीं हत्या का एक आरोपी कोरोन पॉजिटिव भी है.

राजनेताओं के निशाने पर यूपी सरकार

कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने कहा था कि “उप्र में कानून व्यवस्था दम तोड़ चुकी है. आम लोगों की जान लेकर अब इसकी मुनादी की जा रही है. घर हो, सड़क हो, ऑफिस हो कोई भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करता. वहीं मायावती ने कहा था कि सरकार अपराध-नियंत्रण व कानून-व्यवस्था के मामले में तुरंत हरकत में आए.

क्या है पूरा मामला?

बर्रा पांच निवासी लैब टेक्नीशियन (Lab Technician) संजीत यादव 22 जून की देर शाम से लापता थे. दो दिन तक संजीत का कोई सुराग न लगने पर परिजनों ने अपहरण की आशंका जताई थी. परिजनों ने आरोप लगाया था कि बेटी रुचि से शादी तोड़ने पर बर्रा विश्व बैंक कॉलोनी के राहुल यादव ने बेटे का अपहरण किया. इस दौरान पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली.

30 लाख की फिरौती मांगी गई

लैब टेक्नीशियन के रिश्तेदार का दावा किया था कि उन्होंने अपहरणकतार्ओं को 30 लाख रुपये की फिरौती दी है.

29 जून को मांगी गई फिरौती की रकम

अपहरणकर्ताओं ने 29 जून को 30 लाख रुपए की फिरौती के लिए पहली बार कॉल की. आरोप है कि परिवार के जानकारी देने के बाद भी पुलिस का रवैया ढुलमुल रहा. 11 जुलाई तक अपहरणकर्ताओं ने परिजनों को फिरौती के लिए 21 कॉल की. परिजनों ने कहा था कि पुलिस निगरानी में 13 जुलाई को फिरौती की रकम गुजैनी पुल से फेंक दी गई, जिसे लेकर अपहर्ता फरार हो गए.

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