पांच बेटियों के दर्द से कराह रहा उत्तर प्रदेश, समाज से इस पाप को मिटा सकती हैं ये तीन कड़ियां

हाथरस में जो कुछ हुआ उसे दूसरा निर्भया केस कहा जा रहा है और निर्भया के आगे लगा ये 'दूसरा' शब्द ही बता देता है कि जिस निर्भया के लिए पूरा देश उबल पड़ा था. इंसाफ की मांग को लेकर उठ खड़ा हुआ था. उसका कोई असर नहीं पड़ा.

बाराबंकी में दलित रेप पीड़िता के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद सामने आया है.

ऐसा क्यों होता है कि हर बार एक वारदात के बाद हमारा खून खौल उठता है. पूरा देश इंसाफ की मांग के लिए उठ खड़ा होता है और जनता के गुस्से के आगे सिस्टम को झुकना पड़ता है. लोकतंत्र के मंदिर कानून बना देते हैं, लेकिन गुनाह खुद को बार-बार दोहराता रहता है. इसे आप दिल्ली के निर्भया केस से ही समझिए. हाथरस में जो कुछ हुआ उसे दूसरा निर्भया केस कहा जा रहा है और निर्भया के आगे लगा ये ‘दूसरा’ शब्द ही बता देता है कि जिस निर्भया के लिए पूरा देश उबल पड़ा था. इंसाफ की मांग को लेकर उठ खड़ा हुआ था. उसका कोई असर नहीं पड़ा.

आज हम बात करेंगे तीन कड़ियों की, जिसमें सबसे कमजोर कड़ी हैं हमारे अपने करीबी, जो 94 फीसदी रेप की वारदातों में शामिल होते हैं. दूसरी कमजोर कड़ी है पुलिस, जो पीड़िता का जबरन दाह संस्कार कर देती है और तीसरा है कोर्ट, यहां जाकर मामला न्याय से भी अन्याय होने लगता है.

इन तीनों ही कड़ियों की आगे हम विस्तार से चर्चा करेंगे और एक-एक कड़ी की कमजोरी बताएंगे, जिसका बदलना बहुत ही जरूरी है, क्योंकि इसी से हमारी आपकी बेटियां, बहनें महफूज रह सकती हैं. वर्ना सिस्टम तो ऐसा है कि एक बेटी की चिता बुझती नहीं है, दूसरी जल उठती है. इस समय देश का सबसे बड़ा प्रदेश यूपी. पांच बेटियों के दर्द से कराह रहा है.

पांच बेटियों के दर्द से कराह रहा उत्तर प्रदेश

हाथरस में 19 साल की लड़की दरिंदगी का शिकार हुई. बलरामपुर में 21 साल की बेटी को अगवा किया गया, उसके साथ दरिंदगी हुई और वो भी दुनिया छोड़ गई. तीसरी वारदात बागपत की है, जहां 17 साल की लड़की ने दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर जहर खा लिया. चौथी वारदात हाथरस के पास ही बुलंदशहर की है. यहां 13 साल की मासूम बच्ची को घर से अगवा कर रेप किया गया. पांचवीं वारदात आजमगढ़ के जहानागंज की है, यहां दो बेटियों को मां के सामने से दबंग उठा ले गए और आजमगढ़ में ही जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र में 6 साल की मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी की घटना हुई.

इन सब में सबसे पहले जिक्र हाथरस कांड की, जिसको लेकर पूरे देश में उबाल है. आज पीड़ित लड़की की फॉरेंसिक रिपोर्ट आ गई है, जिसमें साफ-साफ लिखा है कि लड़की के साथ रेप नहीं हुआ था. इससे पहले सफरदजंग हॉस्पिटल ने जो पुलिस को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सौंपी उसमें भी रेप का जिक्र नहीं था, लेकिन इससे भी वारदात की गंभीरता कम नहीं हो जाती.

पीड़िता को हुआ ब्लड इंफेक्शन और हार्ट अटैक

रिपोर्ट में बताया गया है कि लड़की की गर्दन पर चोट के निशान थे. वारदात इतनी खौफनाक थी कि लड़की की रीढ़ की हड्डियां तक टूट गई थीं. पीड़िता को ब्लड इंफेक्शन हुआ था और उसे हार्ट अटैक भी आया था. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उसकी मौत का वक्त 29 सितंबर की सुबह 6 बजकर 55 मिनट लिखा है. हाथरस में इस मामले में SIT ने जांच शुरू कर दी है.

हाथरस में लड़की की दरिंदगी पर सियासी हलके में भी उबाल है. जमकर राजनीति हो रही है और होनी भी चाहिए, क्योंकि विपक्ष सवाल उठा रहा है. विपक्ष ने योगी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. हाथरस से दिल्ली तक सियासी संग्राम मच गया.

यमुना एक्सप्रेस-वे पर पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में हुई गुत्थमगुत्था

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी पीड़ित परिवार से मिलने दिल्ली से हाथरस के लिए रवाना हुईं. नोएडा के डीएनडी से राहुल और प्रियंका का काफिला आगे निकला, लेकिन ग्रेटर नोएडा के पास यमुना एक्सप्रेस-वे पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद दोनों ने पैदल ही आगे बढ़ना शुरू कर दिया.

पुलिस ने पूरे एक्सप्रेसवे को छावनी में तब्दील कर रखा था. लिहाज़ा थोड़ी ही देर में कांग्रेस के नेताओं, कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच गुत्थमगुत्थी शुरू हो गई. राहुल गांधी और पुलिस अफसर के बीच बहस होने लगी.

राहुल गांधी ने कहा, “मैं शांति से यहां खड़ा हूं. मैं अकेला जाना चाहता हूं. 144 कहता है पब्लिक असेंबली. मैं पब्लिक असेंबली नहीं करना चाहता हूं. मैं अकेला यहां से पैदल हाथरस जाना चाहता हूं. किस आधार पर आप मुझे गिरफ्तार कर रहे हैं ये बता दीजिए.” कांग्रेस के नेता और पुलिस के बीच कई राउंड बहस हुई. कई बार पुलिस ने लाठीचार्ज किया और धक्कामुक्की में राहुल गांधी जमीन पर गिर गए.

पुलिस ने राहुल-प्रियंका को हिरासत में लिया 

इसके बाद राहुल, प्रियंका, कांग्रेस के दूसरे नेता और तमाम कार्यकर्ता एक्सप्रेसवे पर ही धरने पर बैठ गए. काफी देर के हो हंगामे के बाद पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को गिरफ्तार कर लिया और कुछ देर बाद इन्हें पूरी घेरेबंदी में दिल्ली लेकर गई.

हाथरस में कथित गैंगरेप और हत्या मामले में समाजवादी पार्टी ने कई जगहों पर धरना प्रदर्शन किया और हाथरस के मेन गेट पर जुलूस निकाला. हाथरस में धारा 144 लागू होने के बावजूद सैकड़ों कार्यकर्ता जगह-जगह जुटे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ दी, जिसके बाद सैकड़ों कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया.

“हम पर दबाव बना कर जबरदस्ती कागज पर साइन करा लिए”

इस बीच हाथरस पीड़िता के पिता का भी एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वो जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं. वो कह रहे हैं कि जिला प्रशासन ने उनसे जबरदस्ती कागज पर दस्तखत करा लिए.

पीड़िता के पिता ने कहा, “यहां से हमें दबाव देकर ले गए, थाने लेकर पहुंचे कि योगी से बात कराएंगे. वहां लेकर गए पीडब्ल्यूडी में उनका पूरा प्रेशर था. पुलिसवालों और डीएम साहब ने दबाव डालकर हमारे तीन आदमियों के साइन करा लिए, लेकिन उससे हम संतुष्ट नहीं हैं. मेरी बिटिया के केस की जांच होनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट के जज के द्वारा.”

इस पूरे प्रकरण को देखकर आपको लग गया होगा कि हमारा सिस्टम ऐसी वारदातों को न तो रोकने की कोशिश में जुटा है. न ही ऐसी वारदात करने वालों का हौसला तोड़ने में जुटा है, बल्कि वो लीपापोती में जुटा है. अपनी खाल बचाने में जुटा है और अब हमें ये समझना होगा कि ये ही सिस्टम है, तो इस सिस्टम की हमें जरूरत क्यों होनी चाहिए? जैसा कि हमने कहा था कि बेटियों को बचाने के लिए जो तीन चरण हैं. उसमें पुलिस सिर्फ एक हिस्सा है. अगर हमें वाकई बेटियों को बचाना है. तो हमें इसकी शुरुआत अपने घर से ही करनी होगी.

बलरामपुर में भी हाथरस जैसी हैवानियत

हाथरस की बेटी की चिता की आग बुझी भी नहीं थी कि बलरामपुर में भी एक बिटिया हैवानियत का शिकार हो गई. ऐसी दरिंदगी हुई, जिसे सुनकर रूह कांप जाए और दिल बैठ जाए.

पीड़िता की मां के मुताबिक, “इंजेक्शन लगाए, उसको ले गए, अपने रूम पर ले गए. गैंगरेप किया हमारी बच्ची के साथ. बच्ची का पैर तोड़ दिया, कमर तोड़ दी. हमारी बच्ची एकदम अपंग हो गई थी. हमारी बच्ची को रिक्शावाला लाया लादकर.” एक मां के आंसू अभी सूखे भी नहीं थे कि एक दूसरी मां की बेटी की बलि ले ली गई.

दरअसल मामला बलरामपुर के गैंसड़ी बाजार का है. यहां रहने वाली 21 साल की पीड़िता कॉलेज में एडमिशन लेने गई थी, जिसे आरोपियों ने पहले अगवा किया. बेहोशी का इंजेक्शन लगाकर 3-4 लोगों ने उसे अपनी हवस का शिकार बनाया.

आरोपियों ने डॉक्टर को इलाज के लिए बुलाया

आरोपियों की हिम्मत और हौसला तो देखिए. पहले तो लड़की के साथ जोर-जबरदस्ती की और जब उसकी हालत बिगड़ गई, तो खुद ही एक डॉक्टर को लेकर आए, लेकिन मामला संदिग्ध देख डॉक्टर ने इनकार कर दिया. डॉक्टर ने कहा कि इलाद कराने के लिए घर ले गए थे. घर में पीछे की तरफ लड़की बेड पर पड़ी हुई थी. जब कोई और औरत नहीं देखी, तो डॉक्टर इलाज करने से पीछे हट गया.

जब डॉक्टर ने इनकार कर दिया, तो आरोपियों ने एक रिक्शेवाले को बुलाकर लड़की को उसके घर भेज दिया. साफ है कि आरोपियों को न पुलिस का खौफ था और न समाज का डर, लेकिन एक मां बहुत डर गई थी. दरिंदगी का शिकार हुई अपनी बेटी की दशा देखकर

सभी मामलों में पुलिस की एक जैसी भूमिका

पुलिस है कि हर वारदात की तरह इस कांड में भी गिरफ्तारी की बात करके अपनी पीठ थपथपा रही है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देकर पीड़ित परिवार के कुछ आरोपों को खारिज कर रही है. पीएम रिपोर्ट में लड़की के पैर टूटने की पुष्टि नही हुई है.

कहने को तो पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन जैसे हाथरस में पुलिस पीड़ित परिवार के साथ खड़ी नजर नहीं आई. वैसे ही बलरामपुर में भी दिखा. शायद इसी वजह से, इसी रवैये से दरिंदो के मन मे कानून का खौफ नहीं है और एक के बाद एक लगातार बेटियों से हैवानियत की घटनाएं घट रही हैं.

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