उत्तराखंड कैबिनेट ने दिया राज्यकर्मियों को बड़ी राहत, अब नहीं कटेगी एक दिन की सैलरी

अक्टूबर माह समेत आगे के महीने में अब एक दिन की वेतन कटौती नहीं होगी. अभी तक कोरोना महामारी के कारण हर महीने एक दिन की सैलरी कटती थी.

उत्तराखंड (Uttrakhand) की कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) में बुधवार को कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगी. इसके साथ ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत (Trivendra Singh Rawat) की पहल पर मंत्रिमंडल ने त्योहारी सीजन में प्रदेश के ढाई लाख कर्मिकों को बड़ी राहत दी है. अक्टूबर माह समेत आगे के महीने में अब एक दिन की वेतन कटौती नहीं होगी. अभी तक कोरोना महामारी के कारण हर महीने एक दिन की सैलरी कटती थी. हालांकि मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों, विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के साथ IAS, IPS, IFS संवर्गों के लिए वेतन कटौती जारी रखी है.

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट बैठक हुई. इस दौरान 18 प्रस्ताव रखे गए. इनमें से 17 प्रस्तावों को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. कैबिनेट में हुए फैसलों के बारे में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने विस्तार से जानकारी दी.

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उन्होंने बताया कि एक प्रस्ताव पर कमेटी बनाई गई है. वहीं, हिमालय गढ़वाल विश्वविद्यालय 2016 संशोधन प्रस्ताव पर मुहर लगी. विविव का नाम बदल कर अटल बिहारी वाजपेयी हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय किया गया है.

इन फैसलों को मिली मंजूरी

  1. आबकारी विभाग में अब शराब बिक्री के लिए ट्रेक एंड ट्रेस प्रणाली की शुरुआत की जाएगी.
  2. द्योग विभाग की सेवा नियमावली में संशोधन को मंजूरी.
  3. उत्तराखंड पुलिस आर मोहरीर संशोधन नियमावली संशोधन 2020 को मंजूरी.
  4. उत्तराखंड नागरिक सुरक्षा चयन नियमावली में संशोधन.
  5. राजकीय सहायता प्राप्त माहविद्यालयों को अनुदान दिए जाने को लेकर कैबिनेट में चर्चा की गई. इसे लेकर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है.
  6. उत्तराखंड नागरिक सुरक्षा अधीनस्थ चयन आयोग नियमावली में संशोधन को मंजूरी.
  7. राजकीय महाविद्यालय में छात्र निधि का समुचित उपयोग और प्रबंधन के लिए बनाई गई नियमावली.
  8. पुरुल नीति के तहत पिरुल इकट्ठा करने पर पहले एक रुपये प्रति किलो का दाम तय है, जिसे बढ़ाकर 2 रुपये किया गया है.
  9. वर्ग चार भूमि और वर्ग तीन भूमि को लेकर साल 2016 में कमेटी बनी थी, जिसके बाद फिर कुछ कमेटी बनाई गई थी, लिहाजा अब उसका निर्णय लिया गया है. निर्णय के मुताबिक वर्ग तीन की भूमि को 132 की धारा के तहत न तो रेगुलाइज किया जा सकेगा न ही इस पर मालिकाना हक दिया जाएगा. 1983 और उससे पहले के कब्जेदारों को 2004 के तहत पड़ने वाले सर्किल रेट का मात्र 5 फीसदी देना होगा.

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