मध्यप्रदेश: उपचुनाव से पहले कर्जमाफी पर बवाल, पढ़ें विधानसभा में सरकार और विपक्ष क्यों हुए आमने-सामने

राज्य की बीजेपी (BJP) सरकार किसान कर्जमाफी को ढ़ोंग बता रही थी, लेकिन विधानसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने ये मान लिया कि कर्जमाफी हुई है. इसके बाद विपक्ष हमलावर हुआ और सरकार बचाव की मुद्रा में आ गई.

शिवराज सिंह चौहान और कमल नाथ

मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में किसानों की कर्जमाफी के मुद्दे ने राजनीतिक गलियारों में हंगामा मचा रखा है. राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के ट्वीट के बाद, तो मामला और गर्म होता नजर आ रहा है. दरअसल अभी तक बसबीजेपी सरकार किसान कर्जमाफी को ढ़ोंग बता रही थी, लेकिन विधानसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने ये मान लिया कि कर्जमाफी हुई है.  फिर क्या था, हंगामा तो खड़ा होना ही था.

विपक्ष सरकार पर हमलावर हुआ और सरकार बचाव की मुद्रा में आ गई. सरकार के मंत्रियों ने विधानसभा में दिए गए जवाब पर ही सवाल खड़े कर दिए. वहीं सीएम ने भी कर्जमाफी को झूठ का पुलिंदा बताया. भले ही बीजेपी सरकार अभी तक इसी बात पर अड़ी हो कि किसानों की कर्जमाफी धोखा थी, लेकिन सवाल तो ये है कि आखिर झूठा कौन है? बीजेपी, कांग्रेस या फिर विधानसभा के पटल पर दाखिल किया गया सरकारी जवाब?

सरकारी अफसरों ने विधानसभा में जो फेहरिस्त जमा की है, उसके अनुसार, 51 जिलों में कर्जमाफ किए गए हैं और उसमें किसानों का लेखा जोखा भी है. दरअसल हुआ यूं है कि कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह के सवाल के जवाब में विधानसभा में जानकारी प्रस्तुत की गई कि सरकार ने करीब 27 लाख किसानों का कर्ज माफ किया है.

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इधर सरकार अभी तक कहती आ रही थी कि कर्जमाफी धोखा थी, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि विधानसभा में दाखिल इस जवाब ने सरकार को ही झूठा करार दे दिया है और अब बीजेपी सरकार को सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए.

“अधिकारियों ने भेजी गलत जानकारी”

हालांकि, विधानसभा के पटल पर आने के बाद भी कर्जमाफी वाली इस लिस्ट को फर्जी बताया जा रहा है. सूबे के नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह का कहना है कि, जो जवाब विधानसभा के पटल पर रखा गया है, वो जानकारी गलत भेजी गई है, जो भी जानकारी है वो अधिकारियों के स्तर पर भेजी गई है और वो पूरी तरह से गलत है. उसकी जांच करके उसे ठीक किया जाएगा.

अब मंत्री जी की मानें, तो सरकारी अफसरों ने विधानसभा को धोखा दिया. गलत जवाब दाखिल किया. इतना ही नहीं अपनी ही सरकार के खिलाफ साजिश भी की. ये हम नहीं कह रहे, लेकिन भूपेंद्र सिंह जी के बयान से तो कुछ ऐसा ही लगता है कि सरकारी अफसरों ने विधानसभा को भ्रामक जानकारी भेजी जिसकी जांच होने वाली है.

“कर्जमाफी का मतलब सिर्फ सर्टिफिकेट बांटना नहीं”

वहीं इस मामले में Tv9 भारतवर्ष से बातचीत में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कर्जमाफी सिर्फ धोखा थी. पहले वादा किया गया कि किसानों का 2-2 लाख तक का कर्ज माफ किया जाएगा, लेकिन आखिर में कटते-कटते ये राशि 6 हजार करोड़ तक आ गई. उसमें भी 800 करोड़ रुपए मैंने भरे है. शिवराज ने कहा कि कर्जमाफी करने का मतलब सिर्फ सर्टिफिकेट बांटना नहीं होता. सरकार ने पैसा नहीं भरा सिर्फ सर्टिफिकेट बांट दिए.

विधानसभा में पटल पर कर्जमाफी की जानकारी सामने आने के बाद सरकार उलझती नजर आ रही है. हंगामा इतना जबरदस्त रहा कि सरकार ने आनन-फानन में देर रात कृषि विभाग के संचालक संजीव सिंह का तबादला कर दिया और अब नगरीय प्रशासन मंत्री की मानें, तो मामले की जांच भी की जा रही है. सीएम शिवराज से विपक्ष जवाब मांग रहा है. वहीं शिवराज अपनी बात पर अड़े हैं. ऐसे में आने वाले उपचुनावों में ये मुद्दा जबरदस्त गरमाने वाला है.

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