कोरोना वायरस: महाराष्ट्र में अप्रैल से अब तक डेढ़ लाख लोगों को मिला शराब परमिट

शराब परमिट (Liquor Permit) में एक व्यक्ति शराब का स्टॉक भी कर सकता है. बॉम्बे प्रोहिबिशन एक्ट 1949 के मुताबिक बिना परमिट के शराब को रखना और उसका परिवहन करना एक दंडनीय अपराध है.

  • TV9 Digital
  • Publish Date - 7:49 pm, Wed, 23 September 20

कोरोना वायरस (Corona Virus) के प्रसार को रोकने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन किया गया था. लेकिन इस दौरान शराब के शौकीनों के लिए होम डिलीवरी की सुविधा शुरु की गई थी. महाराष्ट्र (Maharashtra) एक्साइज डिपार्टमेंट के मुताबिक मुंबई में 1 अप्रैल से अब तक 150,955 ऑनलाइन शराब परमिट (Liquor Permit) जारी की गई है. इस दौरान 3,000 ऐसे ग्राहक रहे हैं जिन्होंने हर रोज शराब की होम डिलीवरी करवाई. सोमवार को 3,709 ग्राहकों ने एल्कोहल की होम डिलीवरी करवाई.

महाराष्ट्र में शराब की दुकानों पर भीड़ को कम करने के लिए राज्य सरकार ने एल्कोहल की होम डिलीवरी की अनुमति दी थी. शराब की होम डिलीवरी कराने के लिए ऑनलाइन परमिट होना जरूरी है. लॉकडाउन के दौरान एक्साइज डिपार्टमेंट ने शराब परमिट लेने के लिए ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध कराई थी, साथ ही इसे आसान भी बनाया था. ताकि ज्यादा से ज्यादा राजस्व इकट्ठा किया जा सके.

लगातार आ रहे हैं आवेदन

महाराष्ट्र के आबकारी आयुक्त कांतिलाल उमाप ने कहा कि पब्लिक को शराब परमिट प्राप्त करने के फायदों का एहसास है. उमाप ने कहा “परमिट एक व्यक्ति को न केवल शराब पीने, बल्कि स्टॉक और उसके परिवहन की अनुमति देता है.”

उन्होंने आगे कहा कि हमने लॉकडाउन प्रतिबंधों में ढील के बाद जनता से शराब लाइसेंस लेने का आग्रह किया और परमिट प्राप्त करने की प्रक्रिया को भी सरल बनाया. प्रक्रिया के सरल बनाते ही हमारे पास आवेदनों की बाढ़ आ गई है.

एक्साइट डिपार्टमेंट को 1 अप्रैल से 21 सितंबर तक 156,085 आवेदन मिले. इनमें से 150,955 को परमिट दे दिया गया है. शराब का परमिट एक साल के लिए मिलता है और इसकी फीस 100 रुपये होती है. आजीवन परमिट एक हजार रुपये में मिलता है.

शराब विक्रेता संघ के अध्यक्ष अरविंद मिसकिन ने कहा कि शराब परमिट लोगों को 12 बोतल शराब रखने की अनुमति देता है. लोगों को परमिट सस्ता और आसान लगता है. हालांकि लगातार शराब परमिट को खत्म करने की मांग उठती रही है.

क्या होता है परमिट

बॉम्बे प्रोहिबिशन एक्ट 1949 के मुताबिक शराब खरीदने के लिए व्यक्ति की उम्र 25 साल होनी जरूरी है. स्वास्थ्य कारणों के चलते भी शराब रखने के लिए परमिट की आवश्यक्ता है. हालांकि 1972 में यह एक्ट खत्म कर दिया गया था और इसकी जगह परमिट की व्यवस्था लागू की गई थी.

किसी व्यक्ति को अल्कोहल की निर्धारित मात्रा का उपभोग करने की अनुमति देने के लिए एक परमिट प्रणाली शुरू की गई थी जो 12 यूनिट से अधिक नहीं होनी चाहिए. परमिट में एक व्यक्ति शराब का स्टॉक भी कर सकता है. बॉम्बे प्रोहिबिशन एक्ट 1949 के मुताबिक बिना परमिट के शराब को रखना और उसका परिवहन करना एक दंडनीय अपराध है. इसमें पांच साल तक की कैद और 50 हजार रुपये का जुर्माना लग सकता है.

राजस्व का सबसे बड़ा जरिया है शराब

राज्य सरकार के लिए शराब राजस्व का सबसे बड़ा जरिया है. पिछले वित्तीय वर्ष में महाराष्ट्र को शराब की बिक्री से 15,432 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था. लॉकडाउन के कारण राज्य सरकार को बड़ा वित्तीय घाटा हुआ था. जिसे देखते हुए 4 मई को सरकार ने शराब बिक्री को शुरू किया था.