एक बार फिर गवर्नर के पाले में गेंद, महाराष्‍ट्र विधानसभा का प्रोटेम स्‍पीकर बनने की दौड़ में ये नेता

प्रोटेम स्‍पीकर कौन होगा, इस मामले में गवर्नर अंतिम निर्णय करेंगे. 2018 में कर्नाटक में ऐसे ही हालात होने पर गवर्नर ने परंपरा को दरकिनार कर दिया था.

Maharashtra Pro Tem Speaker

महाराष्‍ट्र विधानसभा में बहुमत परीक्षण के लिए प्रोटेम स्‍पीकर की नियुक्ति की जाएगी. विधानसभा सचिवालय ने 17 वरिष्ठ विधायकों की सूची राजभवन को भेजी है. गवर्नर सदन के सबसे वरिष्‍ठम सदस्‍यों में से एक को इसके लिए चुनेंगे. आमतौर पर प्रोटेम स्पीकर का काम सदस्यों को शपथ दिलाना होता है. सबसे वरिष्‍ठ विधायक को प्रोटेम स्‍पीकर बनाने की परंपरा है. हालांकि महाराष्‍ट्र में पिछली बार ऐसा नहीं हुआ था.

2014 में चुनी गई महाराष्‍ट्र की 13वीं विधानसभा में पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी के गणपतराव देशमुख सबसे वरिष्‍ठ विधायक थे. वह सोलापुर के संगोले से नौंवी बार विधायक बने थे. हालांकि स्‍वास्‍थ्‍य कारणों से उनके इनकार करने पर दूसरे सबसे वरिष्‍ठ सदस्‍य CPI (M) विधायक जीवा पांडु गवित ने बतौर प्रोटेम स्‍पीकर विधायकों को शपथ दिलाई थी. 2019 के चुनाव में देशमुख लड़े नहीं जबकि गवित चुनाव हार गए.

महाराष्‍ट्र की 14वीं विधानसभा में कौन सबसे सीनियर?

महाराष्‍ट्र कांग्रेस के प्रमुख बालासाहेब थोराट आठवीं बार विधायक बने हैं. वह अहमदनगर के संगमनेर से चुनकर आते हैं. हालांकि थोराट को कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना जा चुका है. ऐसे में वह प्रोटेम स्‍पीकर नहीं बन पाएंगे क्‍योंकि विधायक दल के नेता को प्रोटेम स्‍पीकर नहीं बनाया जा सकता.

NCP के बागी अजित पवार भी बारामती से सातवीं बार विधायक चुने गए हैं. उनके अलावा NCP के ही जयंत पाटिल और दिलीप वालसे-पाटिल भी सात-सात बार विधायक रहे हैं. पाट‍िल को भी NCP ने पवार की जगह विधायक दल का नेता चुना है. बीजेपी के बबन राव पचपुते और कालिदास कोलम्बेकर भी सातवीं बार विधायक बने हैं. वहीं कांग्रेस के केसी पडवी भी विधानसभा में 7वीं बार पहुंचे हैं.

नियम-शर्तें लगाने के बाद, योग्‍य वरिष्‍ठतम विधायकों में NCP के दिलीप वालसे-पाटिल, बीजेपी के बबन राव पचपुते और कालिदास कोलम्बेकर और कांग्रेस के केसी पडवी शामिल हैं.

छठी बार विधायक बनने वालों में भाजपा के राधाकृष्‍ण विखे-पाटिल और हरिभाऊ बागड़े हैं. NCP के छगल भुजबल भी छठी बार विधायक बने हैं. दिलीप वालसे-पाटिल ने 12वीं और बागड़े ने 13वीं विधानसभाओं में स्‍पीकर पद संभाला है. अगले स्‍पीकर का चुनाव होने तक बागड़े ही इस पद पर रहेंगे.

कर्नाटक में पिछले साल टूटी परंपरा

इस मामले में गवर्नर अंतिम निर्णय करेंगे. 2018 में कर्नाटक में ऐसे ही हालात होने पर गवर्नर ने परंपरा को दरकिनार कर दिया था. स्‍पीकर वजुभाई वाला ने बीजेपी नेता केजी बोपैया को प्रोटेम स्‍पीकर बनाया था जबकि कांग्रेस के आरवी देशपांडे वरिष्‍ठतम विधायक थे.

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