मुंबई के यश अवधेश समस्याएं झेल पहुंचे IIM, बीच में टूटी हिम्मत, मां ने बढ़ाया हौसला

यश अवधेश गांधी (Yash Awadhesh Gandhi) को सेरेब्रल पाल्सी, डिस्लेक्सिया और डिसर्थिया है, एक ऐसी स्थिति जो बोलने के लिए आवश्यक मांसपेशियों को कमजोर करती है. यश के माता-पिता हमेशा उनका साथ देते आए हैं.

मुंबई (Mumbai) के रहने वाले यश अवधेश गांधी (Yash Awadhesh Gandhi) ने सेरेब्रल पल्सी, डिस्लेक्सिया, डिसर्थिया से जूझते हुए 92.5 प्रतिशत अंकों के साथ CAT-2019 परीक्षा पास कर उदाहरण पेश किया है. अब आईएआईएम-लखनऊ के छात्र 21 वर्षीय यश पिछले एक महीने से मुंबई स्थित अपने घर से ऑनलाइन कक्षाओं में शामिल हो रहे हैं.

एक स्थानीय समाचारपत्र को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “मैं नंबरों को लेकर समस्याओं का सामना करता हूं. इसलिए मुझे ज्यादा मेहनत करनी पड़ी, विशेष रूप से क्वांटिटेटिव एबिलिटी सेलेक्शन में. यह कठिन था, लेकिन असंभव नहीं था.”

यश को लिखित परीक्षा देने के लिए एक राइटर की जरूरत पड़ी, क्योंकि उन्हें चलने में कठिनाई होती है, लेकिन फिर भी वह मुंबई की लोकल ट्रेनों में यात्रा करते हैं. वह ठीक से बोल नहीं पाते हैं, लेकिन अपने विचारों और भावनाओं को स्पष्टता के साथ जाहिर करते हैं. उनकी कहानी प्रेरणादायक है.

कई IIM से आए इंटरव्यू कॉल, चुना लखनऊ

यश ने कैट के लिए जुलाई 2018 में तैयारी शुरू कर दी थी, जब वह अपने स्नातक के दूसरे वर्ष में थे. उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और कैट पास करने के बाद, उन्हें कोझिकोड और इंदौर समेत कई आईआईएम से इंटरव्यू कॉल आए, लेकिन उन्होंने लखनऊ को चुना, क्योंकि इसकी रैंकिंग ज्यादा बेहतर है. उन्होंने शैक्षणिक सत्र (Academic Session) 2020-22 के लिए विकलांग कोटा के तहत आईआईएम-लखनऊ में दाखिला लिया.

इन समस्याओं के चलते करनी पड़ी कड़ी मेहनत

यश को सेरेब्रल पाल्सी, डिस्लेक्सिया और डिसर्थिया है, एक ऐसी स्थिति जो बोलने के लिए जरूरी मांसपेशियों को कमजोर करती है. यश के माता-पिता हमेशा उनका साथ देते आए हैं. एक प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले यश के पिता अवधेश गांधी ने कहा, “जब उसने स्कूल जाना शुरू किया, तो उसे सीखने में दिक्कत हुई और वह अपने सहपाठियों से प्रतिस्पर्धा (Competition) नहीं कर पा रहा था. उसे आम बच्चों की अपेक्षा हमेशा ज्यादा मेहनत करनी पड़ी.”

हिम्मत टूटने पर मां ने बढ़ाया हौसला

उन्होंने कहा कि CAT के लिए तैयारी करते समय, एक पड़ाव ऐसा भी आया जब यश इतना उदास था कि उसने इसे छोड़ देने का फैसला किया. यश की मां जिग्नाशा ने कहा, “मैंने उसे बताया कि उसमें कुछ भी करने की क्षमता है और उसे कोशिश करनी बंद नहीं करनी चाहिए. इसके बाद यश ने फिर से शुरू किया.”

यश कभी हार नहीं मानता है: गुरु

अपने गुरु हर्षित हिंदोचा के लिए यश के दिल में एक खास स्थान है. हर्षित ने कहा कि यश की सफलता धैर्य और प्रतिबद्धता (Commitment) की एक आदर्श कहानी है. वह शांत रहता है. वह कभी हार नहीं मानता है. यश ने अपना ग्रेजुएशन मुंबई के मीठीबाई कॉलेज से अकाउंटिंग और फाइनेंस से किया और टॉप 5 में जगह बनाई.

Related Posts