‘अकेले बाहर निकली ही क्यों…’, रात में यूपी पुलिस से मदद मांगने पर महिला को मिला यह जवाब, साथ थे तीन छोटे बच्चे

उत्तर प्रदेश के रामपुर में मिलक पुलिस की असंवेदनशीलता सामने आई है. यहां अगर आप मुसीबत में फंस जाएं और पुलिस से सहायता मांगने की सोचें, तो यह बिल्कुल भी उम्मीद मत कीजिएगा कि पुलिस आपकी सहायता करेगी.

पुलिस प्रतीकात्मक तस्वीर
पुलिस प्रतीकात्मक तस्वीर

उत्तर प्रदेश के रामपुर में मिलक पुलिस (Uttar Pradesh Police) की असंवेदनशीलता सामने आई है. यहां अगर आप मुसीबत में फंस जाएं और पुलिस से सहायता मांगने की सोचें, तो यह बिल्कुल भी उम्मीद मत कीजिएगा कि पुलिस आपकी सहायता करेगी. खासकर अगर आप महिला हैं तो पुलिस आपकी सहायता कतई नहीं करेगी. वह पुलिस (Uttar Pradesh Police) जिसके लिए उत्तर प्रदेश में महिलाओं के लिए सबसे भरोसेमंद मित्र बताए जाने का ढिंढोरा पीटा जाता है.

आप कहीं घनघोर अंधेरे और सुनसान सड़क पर किसी कारण वश फस जाएं और आप वहां मौजूद पुलिस और 112 नंबर की गाड़ी से सहायता मांगे तो, वह बिल्कुल भी आपकी हेल्प नहीं करेंगे.

उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) महिलाओं की सुरक्षा और सहायता का दावा करते हैं. उन्होंने 112 सेवा के जरिए महिलाओं को रात्रि में किसी प्रकार की समस्या आने पर सहायता दिए जाने का वादा किया है. इसके साथ ही यूपी पुलिस को लोगों का मित्र बताया था और सहायता करने का आश्वासन दिया था. लेकिन, यह सब दावे खोखले हैं.

महिलाएं, पुलिस के पास सहायता के लिए जाती हैं लेकिन, पुलिस उनकी सहायता नहीं कर रही है. ऐसा ही मामला बीती रात कोतवाली मिलक क्षेत्र के रठोडा चौराहे से सामने आया है जहां पुलिस चौकी पर देखने को मिला.

क्या था मामला

रुद्रपुर के मोहल्ला जीपीएस निवासी पूनम शनिवार को दवा लेने के लिए धमोरा आई थी. वहां उसे दवा लेते-लेते रात हो गई. वापस घर जाने के लिए पूनम धमोरा से ई रिक्शा में बैठकर  राठौड़ा चौराहे पहुंची. वहां अपने 6 वर्षीय पुत्री राधिका, 4 वर्षीय पुत्री परि और 2 वर्षीय पुत्र गोलू के साथ सड़क किनारे खड़ी होकर वाहन का इंतजार करने लगी. रात के सात बजे जाने पर भी कोई भी वाहन घर जाने के लिए नहीं मिला. महिला ने कई बार 112 पर कॉल की. इमरजेंसी सेवा का नंबर ना लगने पर महिला ने चौराहे पर मौजूद 112 की गाड़ी में बैठे पुलिसकर्मियों से सहायता मांगी, लेकिन, उन लोगों ने महिला को बातें बनाकर टरका दिया.

इसी दौरान कोतवाल अनिल कुमार सिंह फोर्स के साथ चौराहे पर चेकिंग के लिए पहुंचे. उन्हें देखकर महिला ने उनके पास पहुंची और उसने कहा कि उसे महिला कांस्टेबल के साथ पुलिस किसी वाहन के द्वारा रुद्रपुर के बॉर्डर तक भेजने का प्रबंध कर दे. लेकिन, कोतवाल ने उसकी नहीं सुनी. किसी ने फोन कर इस विषय में मीडिया कर्मियों को जानकारी दी. सूचना मिलने पर चौकी पर पहुंचे मीडिया कर्मियों ने कोतवाल से महिला की सहायता करने के विषय में सवाल पूछा. कोतवाल कुछ भी जवाब दिए बिना, अपनी गाड़ी में बैठकर वहां से चले गए.

पुलिस अधिकारी बोले, महिला रात को वहां आई ही क्यों

इसके बाद मीडियावालों ने सी ओ धर्म सिंह मार्छाल को फोन किया. वह बोले कि महिला रात के समय यहां आई ही क्यों और उसे पहुंचाने की जिम्मेदारी पुलिस की नहीं है. इसका पति आए और इसे ले जाए. महिला ने बताया कि उसके पति का एक्सीडेंट हो गया है और वह बाइक नहीं चला सकते. लेकिन, सीओ ने फोन काट दिया. इसके बाद मीडिया कर्मियों ने एसडीएम अभय कुमार पांडे को जानकारी दी. एसडीएम ने फोन कर कोतवाल से पूछा तो कोतवाल ने बताया कि, कोतवाली में एक भी महिला कांस्टेबल नहीं है. महिला की सहायता नहीं की जा सकती. जबकि, कोतवाली में 5 से 6 की संख्या में महिला कांस्टेबल मौजूद रहती हैं.

फिर एसडीएम ने कोतवाल से कहा कि महिला को कोतवाली बुला लो और उसके परिजनों को सूचना कर दो. वह आकर उसे ले जाएंगे. महिला ने आरोप लगाया कि उसने कोतवाल से कहा कि वह किराये के पैसे दे देगी. पुलिस, उसे घर तक जाने के लिए कोई वाहन किराये पर उपलब्ध करा दें. लेकिन, कोतवाल ने उसकी बात नही सुनी और वहां से चले गए. महिला अपने तीन बच्चों को लेकर राठौड़ा चौकी के आहते में बैठी रही. मीडिया कर्मियों ने उसके घायल पति सुभाष को फोन किया और कहा कि वह स्वयं ही किसी वाहन का जुगाड़ करके अपनी पत्नी को ले जाए. रात के दस बजे महिला का पति मजबूरन किसी तरह घायल हालत में ही बाइक लेकर रुद्रपुर से रठोंडा पुलिस चौकी पहुंचा. आखिरकार रात के साढ़े दस बजे महिला अपने तीनों बच्चों और पति के साथ बाइक से अपने वापस घर लौट गई. यह घटना दर्शाती है न्यायालय या प्रदेश सरकार कितना भी महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस सहायता का दावा करें, वर्तमान में वह सभी दावे खोखले ही साबित हो रहे है.

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