अनाथालय में गुजरा बचपन, काम करते-करते पढ़ाई की, अब बने कलेक्‍टर

थालासेर के मूल निवासी नासर 5 साल की उम्र में अनाथ हो गए थे और तबसे लेकर 17 साल तक वे एक अनाथालय में रहे.

केरल के रहने वाले बी अब्दुल नासर की जिंदगी दो हफ्ते पहले तो काफी संघर्षपूर्ण थी, जबतक की उन्हें यह ऑर्डर नहीं मिला कि आईएएस नासर को साउथ केरक के कोल्लम का कलेक्टर नियुक्त कर दिया गया है. आईएएस के लिए यह ऑर्डर ढेर सारी खुशियां लेकर आया.

थालासेर के मूल निवासी नासर 5 साल की उम्र में अनाथ हो गए थे और तबसे लेकर 17 साल तक वे एक अनाथालय में रहे. 1982 में थालासेर के एक सब-कलेक्टर ने अनाथाश्रम में विजिट किया था, जिसके बाद से नासर के मन में इच्छा जगी कि वे भी कलेक्टर बनेंगे.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नासर ने कहा, “मैं अपने छह बहन-भाइयों में सबसे छोटा था. जब मेरे पिता की मौत हुई तो मेरी मां मंजुम्मा के सिर हमारे पालन-पोषण की पूरी जिम्मेदारी आ गई. यह मुश्किल था, इसलिए पांच साल की उम्र में मुझे अनाथाश्रम भेज दिया गया. मैं जब 1982 में अनाथालय द्वारा संचालित स्कूल में पढ़ाई कर रहा था, तब सब-कलेक्टर अमिताभ कांत ने स्कूल का दौरा किया. एक युवा आईएएस अधिकारी को देखकर, मैंने सपना देखना शुरू कर दिया कि मैं भी कलेक्टर बनूंगा.”

मां बनीं प्रेरणा

रिपोर्ट्स के मुताबिक अपनी मां के बारे में बात करते हुए 49 वर्षीय नासर ने कहा, “वे मेरी जीवन की सबसे ज्यादा हिम्मत बांधने वाली शख्सियत थीं. उन्हें अपने जीवन में पाकर मैं खुद को धन्य मानता हूं. अगर वह सब न हुआ होता तो आज मैं यहां नहीं होता. वे मुझे अपनी प्रार्थना से प्रेरित करती थीं.” इसके साथ ही नासर ने बताया कि उनकी मां का निधन पांच वर्ष पूर्व हुआ है.

होटल में काम

10 साल की उम्र में नासर ने होटल में नौकरी भी की. इसे लेकर नासर कहते हैं कि किसी भी दस साल के बच्चे के लिए होटल में नौकरी पाना बहुत ही आसान है. उन्होंने कई होटल में सप्लायर और क्लीनर के तौर पर काम किया है.

पढ़ाई-नौकरी का साथ में बिठाया तालमेल

दसवीं के परीक्षा पास करने के बाद नासर को केरल के अन्य अनाथालय में भेज दिया गया था, जहां पर उन्होंने अपनी बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी की. नासर कहते हैं कि उन्हें पढ़ाई करना पसंद नहीं था, लेकिन उनकी मां हमेंशा उनपर पढ़ाई करने के लिए दवाब बनाती थीं.

12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद नासर बेंगलरू चले गए, जहां पर उन्होंने हेल्थ इंस्पेक्टर डिप्लोमा कोर्स किया. इसके बाद वे वापस थालासेर आए और सरकारी ब्रेनन कॉलेज में इंग्लिश लिटरेचर में बीए में दाखिला लिया.

पढ़ाई के साथ-साथ नासर नौकरी भी करते थे. नासर ट्यूशन पढ़ाते थे और टेलीफोन ऑपरेटर और न्यूजपेपर बांटने का भी काम करते थे. ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद नासर ने कोझिकोड के फारूक कॉलेज से मास्टर डिग्री की पढ़ाई की.

सरकारी नौकरी

  • 1994 में हेल्थ इंस्पेक्टर के तौर पर केरल हेल्थ डिपार्टमेंट में नौकरी की.
  • एक साल नौकरी करने के बाद उनके एक सीनियर ने उन्हें गांव में प्राइमरी स्कूल टीचर के तौर पर काम करने के लिए बुला लिया था, लेकिन वे ज्यादा समय वहां नहीं रुके और वापस हेल्थ डिपार्टमेंट ज्वाइन कर लिया.
  • इस दौरान केरल सरकार ने डिप्युटी कलेक्टर पोस्ट निकालने की घोषणा की. नासर ने इसके लिए अप्लाई किया.
  • सिविल सर्विस में जाना नासर का सपना था और इस सपने को पूरा करने के लिए उनका साथ दिया उनकी पत्नी एमके रुकसाना ने. रुकसाना स्कूल टीचर के तौर पर काम करती हैं. नासर ने अपनी नौकरी से छुट्टी ली और वे पूरी लगन से सिविल सर्विस की तैयारी में जुट गए.
  • 2002 में नासर ने यूपीएससी प्रीलिम्स परीक्षा दी.
  • 2004 में उन्होंने स्टेट सिविल परीक्षा दी.
  • 2006 में वे स्टेट सिविल परीक्षा में चुने गए और उन्हें डिप्युटी कलेक्टर के तौर पर नियुक्त किया गया.
  • 2015 में नासर राज्य के बेस्ट डिप्युटी कलेक्टर के तौर पर पहचाने गए.
  • साल 2017 में उन्हें आईएएस अधिकारी के तौर पर प्रमोशन मिला.

 

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