, अमेरिका में मोना दास ने गाड़े झंडे, जानें क्या है गोल
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अमेरिका में मोना दास ने गाड़े झंडे, जानें क्या है गोल

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वॉशिंगटन

भारतीय मूल की मोना दास, वह महिला हैं जिन्हें वॉशिंगटन राज्य के 47वें जिले की सिनेटर के रूप में नियुक्त किया गया है. जनवरी में जब मोना को सिनेटर नियुक्त किया गया तो उन्होंने हिंदुओं की धार्मिक किताब गीता पर हाथ रखकर सिनेटर पद की शपथ ली. मोना का जन्म बिहार के मुंगेर जिले में खड़गपुर के दरियापुर गांव में हुआ था.

47 वर्षीय मोना दास का जन्म 1971 में दरभंगा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में हुआ था. वे जब केवल 8 महीने की थीं, तब उनके परिजन उन्हें अमेरिका में लेकर शिफ्ट हो गए थे. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मोना दास के दादा डॉ. जीएन एक रिटायर्ड सिविल सर्जन हैं, जो कि भागलपुर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल और दरभंगा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में काम कर चुके हैं. वहीं मोना दास के पिता सुबोध दास एक इंजीनियर हैं. बिजनेसवुमेन और राजनेता मोना दास सिनसिनाटी यूनिवर्सिटी से साइकोलॉजी में ग्रेजुऐट हैं.

मोदी को बताया ग्रेट-डायनामिक

डेमोक्रेटिक पार्टी की सदस्य मोना दास ने सिनेटर बनने के बाद भारत के लिए अपना प्यार दिखाया था और साथ ही उन्होंने भारतीय लोगों के लिए अपने संदेश भी दिया. इसके अलावा उन्होंने अपने संदेश में महात्मा गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात भी की. मोना दास ने पीएम मोदी को एक ग्रेट और डायनामिक लीडर बताया. इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि किसी भी लड़की के लिए शिक्षा उसकी जिंदगी की कामयाबी के लिए बहुत जरूरी है. अगर आप एक लड़की को शिक्षित करते हैं तो एक पूरा परिवार शिक्षित होता है और इसके साथ ही उसकी आने वाली पीढ़ी भी शिक्षित होती है. एक सिनेटर के तौर पर उन्होंने फैसला किया है कि वे लड़कियों की शिक्षा को लेकर काम करेंगी और इसी दिशा में काम करेंगी.

महिला कल्याण, सबका मान

अपने एक इंटरव्यू में मोना दास ने कहा था कि वे अपने पैतृक गांव जाने की योजना बना रही हैं. महिला कल्याण, सबका मान का नारा देते हुए मोना दास ने कहा था कि वे गांववालों से मिलकर महिलाओं की शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने के लिए उनसे बात करेंगी. इसके अलावा उनके भविष्य को बेहतर बनाने के लिए प्रयास करेंगी, जिससे कि समाज को फायदा पहुंचे. वहीं मोना के सिनेटर बनने के बाद उनके गांव के लोगों को भी काफी खुशी हुई. उनका कहना था कि मोना देश की बेटी हैं और उन्होंने देश का नाम रोशन किया.

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