shah Faesal IAS IAS topper Jammu & kashmir, 2010 से 2019…! शाह फैसल का मिशन एक, प्रोफेशन दो
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2010 से 2019…! शाह फैसल का मिशन एक, प्रोफेशन दो

shah Faesal IAS IAS topper Jammu & kashmir, 2010 से 2019…! शाह फैसल का मिशन एक, प्रोफेशन दो

नयी दिल्ली : आप हमेशा एक टूरिस्ट की भूमिका में नहीं रह सकते. खूबसूरत घाटी के असुरक्षित माहौल में कश्मीरी नौजवानों या लोगों का गुजर बसर करना…इनकी आवाज़ को बुलंद करना…इन्हें स्पेस देना! ये वो चंद लाइनें हैं, जो जून 2010 में सिविल सेवा परीक्षा में अव्वल आने के बाद जम्मू कश्मीर के शाह फैसल ने एक इंटरव्यू में कही थीं.

….और करीब साढ़े आठ साल बाद घुटनभरे माहौल को ख़त्म करने के लिए आईएएस में टॉप किये इस पहले कश्मीरी शाह फैसल ने नौकरी से मुंह मोड़ लिया है. कश्मीर में लगातार हो रही हत्याओं से वो आजिज आ चुके हैं. भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देते वक़्त फैसल ने जिक्र किया कि नफरत भरे इस माहौल को सुधारने के लिए नौकरी के अलावा अब कुछ और करने का समय आ गया है. आतंकी हमले में अपने पिता को खो देने वाले इस शख़्स का कहना है कि अब आवाज दबायी नहीं जा सकती.

कोई कह रहा है कि लिए इन्हें ऐसा करने के लिए पाकिस्तान सरकार की तरफ से पैसे मिले होंगे तो कोई ये कहा रहा है कि जो अपनी ड्यूटी नहीं कर सकता वो आगे क्या करेगा. पर इन सब बातों से बेफिक्र फैसल कहते हैं कि जब तक सही लोग लोकसभा,विधानसभा नहीं पहुंचेंगे तब तक हालात नहीं सुधरेंगे. मुस्लिम आबादी को दरकिनार करने का आरोप मढ़ने वाले फैसल अभी अपना अधिकतर समय लोगों के बीच में गुजार रहे हैं, ताकि समस्याएं जानी और समझी जा सकें.

बेलने पड़े पापड़ 
1994 के समय में फैसल आईपीएस अब्दुल गनी मीर के दीवाने थे पर 2019 आते आते वो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मुरीद हो गए. जिस तरीके से ये काम करते हैं, फैसल उसके दीवाने हो गए हैं. हालांकि उनका यह भी कहना है कि जम्मू कश्मीर की सिचुएशन मुझे इस बात की इजाजत नहीं देती कि मैं इनकी तरह से पॉलिटिक्स कर सकूं. वो बताते हैं कि नौकरी छोड़ने के बारे में उन्हें अपने परिवार की हां के लिए काफी पापड़ बेलने पड़े, पर आखिर में उनकी जीत हुई. वो जल्द ही पॉलिटिक्स में एंट्री करने वाले हैं.

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इनके लिए दीवानगी 
इक़बाल की शायरी के दीवाने डॉक्टर फैसल अपने इस्तीफे की टाइमिंग को एकदम सही बताते हैं. श्रीनगर के मेडिकल कॉलेज से MBBS करने वाले फैसल को यह कभी यकीन नहीं था कि वो आईएएस में टॉप करेंगे. पर उन्हें इस बात का तो पूरा विश्वास था कि क्वालीफाई जरूर कर लेंगे. उर्दू और अंग्रेजी साहित्य को काफी चाव से पढ़ना इन्हें पसंद है. टॉपर बनने के बाद घाटी में बहुत कुछ बदल गया, पर जो नहीं बदला वो है फैसल का इरादा. तब कहते थे कि वो यहां के लोगों की आवाज बनेंगे, उनकी समस्याएं सुलझाएंगे और आज जब वो नौकरी छोड़ चुके हैं तो भी उसी पर कायम हैं. 

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