भारत की एक और बड़ी उपलब्धि, बना चीन के बाद PPE का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश

बेंगलुरु भारत में लगभग 50 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ पीपीई (PPE) मैनुफैक्चरिंग के केंद्र के रूप में उभरा है, जहां पीपीई (PPE) का सबसे ज्यादा उत्पादन किया जा रहा है.
PPE manufacturing in India, भारत की एक और बड़ी उपलब्धि, बना चीन के बाद PPE का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश

कोरोनावायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) के इस संकट काल में भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. सरकारी कंपनी इंडिया इनवेस्ट के अनुसार, भारत पीपीई किट (PPE kits) का दूसरा सबसे बड़ा निर्माता या मैन्युफैक्चरर देश बन गया है, जिसे कोरोनावायरस से लड़ने के लिए बेहद जरूरी माना जाता है. यह उपलब्धि भारत ने इन दो महीनों में हासिल की है. इस क्षेत्र में अब केवल चीन (China) ही भारत से आगे है.

भारत में नहीं था एक भी पीपीई का कारखाना

एक मार्च तक यानी कि देश में कोरोनावायरस का कहर बढ़ने से ठीक पहले, भारत कभी N-95 मास्क (Mask) का उत्पादन नहीं करता था. इससे पहले भारत में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण या पीपीई का उत्पादन करने वाला कोई कारखाना नहीं था. वहीं, 18 मई तक भारत ने रोजाना 4.5 लाख पीपीई का उत्पादन किया.

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वैश्विक बाजार में बढ़ा कारोबार

आज, भारत में 600 से ज्यादा प्रमाणित कंपनियां पीपीई किट्स बना रही हैं. 2019 में इन कपनियों के विदेशी बाजार का कारोबार 52.7 बिलियन डॉलर था, जो साल 2025 तक 92.5 बिलियन डॉलर से ज्यादा होने की उम्मीद है. 30 मार्च तक भारत ने एक टारगेट के रूप में हर दिन 8,000 पीपीई का उत्पादन किया. इंडिया इनवेस्ट के अनुसार, केवल 60 दिनों में 7,000 करोड़ रुपये के कारोबार के साथ इस क्षेत्र में 56 गुने से ज्यादा की बढ़ोत्तरी हुई है.

आमतौर पर एक पीपीई किट में मास्क (सर्जिकल और N-95), ग्लव्स, गाउन, एप्रन, फेस प्रोटेक्टर, फेस शील्ड, स्पेशल हेलमेट, रेस्पिरेटर्स, आई प्रोटेक्टर, गोगल्स, हेड कवर और शू कवर शामिल होते हैं.

चीन है पीपीई का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरर

वर्तमान में PPEs के निर्माण और निर्यात दोनों में, चीन दुनिया में सबसे आगे है. भारत के पास PPE Kits का घरेलू बाजार भी है और वैश्विक बाजार भी. इस समय अमेरिका और एशिया पैसिफिक PPE के सबसे बड़े बाजार हैं, जिन पर भारतीय मैन्युफैक्चरर्स की नजर है. इन दोनों क्षेत्रों में 61 प्रतिशत (33 प्रतिशत+28 प्रतिशत) की पार्टनरशिप है. वहीं, यूरोप में 22 प्रतिशत की अतिरिक्त हिस्सेदारी है.

इंडिया इन्‍वेस्ट पेपर के अनुसार, 2002 से 2004 में SARS महामारी के बाद सिंगापुर ने काफी मात्रा में डिस्पोजेबल PPE का स्टॉक किया था, जिसका फायदा उसे कोरोनावायरस के संकट से लड़ने में भी मिला है. यह देखते हुए भारत भी पीपीई के अपने बाजार को बढ़ाना चाहता है.

फिलहाल नहीं किया जाएगा पीपीई का निर्यात

कई पीपीई प्रोडक्ट्स को भारत से बाहर भेजे जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, क्योंकि वर्तमान में इनकी ज्यादा जरूरत भारत के फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को है. लेकिन हाल ही में एक वेबिनार (Webinar) में, परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (AEPC) ने स्थानीय निर्माताओं द्वारा घरेलू मांगों को पूरा होने के बाद इसके निर्यात पर से प्रतिबंध हटाने की बात रखी है. भारत 15.96 लाख पीपीई किट्स का निर्माण कर चुका है और अभी 2.22 करोड़​ किट्स का निर्माण किया जा रहा है.

भारत में पीपीई निर्माण केंद्र

बेंगलुरु भारत में लगभग 50 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ पीपीई मैनुफैक्चरिंग के केंद्र के रूप में उभरा है, जहां पीपीई का सबसे ज्यादा उत्पादन किया जा रहा है. अन्य निर्माण केंद्र तिरुप्पुर, कोयंबटूर, चेन्नई (तमिलनाडु में), अहमदाबाद, वडोदरा (गुजरात में), लुधियाना (पंजाब में), भिवंडी (महाराष्ट्र), कोलकाता (पश्चिम बंगाल), नोएडा (उत्तर प्रदेश) और गुड़गांव (हरियाणा) हैं.

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