स्‍टेशन पर की पढ़ाई, दोगुनी सैलरी वाली नौकरी ठुकराई, अब बने माइक्रोसॉफ्ट इंडिया हेड

27 सालों में राजीव ने अहम पदों पर रहते हुए बड़ी-बड़ी जिम्मेदारियां संभाली हैं. इस मुकाम तक पहुंचने के लिए राजीव को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी.

अपनी मेहनत और लगने से एक व्यक्ति कामयाबी के हर शिखर पर पहुंच सकता है और ऐसा ही कुछ करके दिखाया बिहार के रहने वाले राजीव कुमार ने. 51 वर्षीय राजीव कुमार 27 सालों से माइक्रोसॉफ्ट कंपनी में अलग-अलग पदों पर काम कर चुके हैं. उनकी मेहनत और लगन को देखते हुए अब राजीव को माइक्रोसॉफ्ट हेड बनाया गया है.

इन 27 सालों में राजीव ने अहम पदों पर रहते हुए बड़ी-बड़ी जिम्मेदारियां संभाली हैं. इस मुकाम तक पहुंचने के लिए राजीव को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. आज आपको बिहार के इस बाबू राजीव कुमार की जिंदगी से जुड़े कुछ किस्से बताते हैं जो कि शायद ही लोग जानते होंगे.

रेलवे स्‍टेशन पर की पढ़ाई

राजीव कुमार का जन्म बौंसी के जबरा गांव में हुआ था. उनके पिता एक स्कूल टीचर थे. अपने परिवार से राजीव बहुत प्यार करते हैं. राजीव के पिता झारखंड के साहेबगंज में स्थित सेंट जेवियर्स स्कूल में पढ़ाते थे. अपने बेटे को अच्छी शिक्षा देने के लिए उन्होंने राजीव का दाखिला अपने ही स्कूल में करवा लिया था.

जब राजीव की 10वीं तक शिक्षा पूरी हुई तो उनका एडमिशन कोलकाता के सेंट जेवियर्स स्कूल में कराया गया. स्कूल के हॉस्टल में कमरा खाली न होने के कारण उन्हें रेलवे स्टेशन पर रहना पड़ा. स्टेशन के रिटायरिंग रूम में रहकर उन्होंने काफी समय तक पढ़ाई की.

ठुकराई दोगुनी सैलरी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजीव ने बताया कि जब उनकी मास्टर डिग्री पूरी हुई थी तो उन्हें दो बड़ी कंपनियों में कैम्पस प्लेसमेंट के जरिए काम करने का मौका मिला था.

कैम्पस प्लेसमेंट के दौरान एक ऑयल कंपनी राजीव को 59 हजार डॉलर ऑफर कर रही थी, तो वहीं माइक्रोसॉफ्ट ने उन्हें 28 हजार डॉलर का ऑफर दिया था, पर राजीव ने दोगुना सैलरी का ऑफर ठुकराते हुए माइक्रोसॉफ्ट को चुना. राजीव ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वे एक नई कंपनी के साथ जुड़कर खुद को साबित करना चाहते थे.

दिल्ली में थी पढ़ने की इच्छा पर पहुंचे रुड़की

रिपोर्ट के अनुसार, राजीव ने बताया कि उनके भाई दिल्ली-आईआईटी में पढ़ते थे. उन्हें दिल्ली में पढ़ता देख राजीव की भी इच्छा दिल्ला में पढ़ने की हुई, पर किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था. राजीव ने परीक्षा दी तो उनका नंबर आईआईटी रुड़की में आया और दिल्ली में पढ़ने का सपना उनका धरा का धरा रह गया.

प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ में अच्छा तालमेल

राजीव अपनी बिजी प्रोफेशनल लाइफ से समय निकालकर अपने परिवार को पूरा वक्त देते हैं. राजीव को संगीत का काफी शौक है. जब भी उन्हें समय मिलता है तो वे अपनी बेटियों के साथ मिलकर तबले पर ताल ठोकने लगते हैं.

 

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