पढ़ाई छोड़ करगिल की जंग लड़ी, रिटायरमेंट के बाद एक सैनिक ने यूं सच किया सपना

दो दशकों से ज्यादा लंबे इंतजार के बाद नसीब फोगाट का नसीब का सपना पूरा होने जा रहा है.

करगिल युद्ध में दुश्‍मनों के छक्‍के छुड़ाने वाले नसीब फोगाट अब हरियाणा स्टेट सिविल कमीशन में अफसर बनेंगे. कमजोर आर्थिक स्थिति और परिवार की मुश्किलों से जूझते हुए नसीब ने अपना नसीब बदल दिया. उन्होने आर्मी से समयपूर्व रिटायरमेंट (VRS) ले लिया था. दो दशकों से ज्यादा लंबे इंतजार के बाद नसीब का नसीब का सपना पूरा होने जा रहा है. नसीब फोगाट धैर्य और कड़ी मेहनत का जीती-जागती मिसाल हैं. नसीब का न केवल चयन हुआ बल्कि उनका नाम टॉपर्स की लिस्ट में है.

17 साल के नसीब को अपनी पढाई बीच में छोड़नी पड़ी थी. 1998 का वो दौर था जब नसीब खटीवास गांव के चरखी दादरी जिले के एक स्कूल में पढा करते थे. घर की आर्थिक स्थिति पहले ही दयनीय थी. बाढ़ और ओलों से फसल बर्बाद होने के कारण उन्हें अपनी पढाई छोड़ देनी पड़ी. उन्होने सेना में भर्ती होने का निर्णय लिया. सेना में अपनी सेवाएं दीं. करगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ मोर्चा भी संभाला. 2014 में सेना से उन्होने रिटायरमेंट ले ली. पिछले दो दशकों में उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएट की दो डिग्रियां लीं और लॉ की डिग्री भी पूरी की.

नसीब उन दुर्लभ ब्योरोक्रेट्स में से एक होंगे जिन्‍होंने करगिल युद्ध में हिस्‍सा लिया था. नसीब के लिए साल 2014 से 2018 के बीच जीवन यापन करना बहुत मुशिक्ल हो गया था. पेंशन से मिलने वाली राशि उनके परिवार के जीवनयापन के लिए नाकाफी थी. फोगाट ने बताया कि पेंशन दोनों बेटियों की पढाई-लिखाई और अपनी तैयारी पर खर्च कर देते थे.

फोगट एचसीएस (कार्यकारी शाखा) में एक सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) या एक समकक्ष रैंक पर पदभार संभालने को तैयार है. नसीब ने बताया कि उन्होंने दो बार भारतीय सेना में कमीशन अधिकारी के लिए परीक्षा और इंटरव्यू पास कर लिया था, लेकिन सेलेक्शन नहीं हो पया. सेना के एक ऑपरेशन में एक छोटी सी चोट के कारण चिकित्सा आधार पर उन्हें पास नहीं किया गया था.

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