एक एक्सीडेंट ने हैदराबाद के नीलकंठ को बना दिया दुनिया का सबसे तेज ‘ह्यूमन कैलकुलेटर’, पढ़ें पूरी कहानी

महज 20 साल की उम्र में नीलकंठ ने 'मेंटल कैलकुलेशन वर्ल्ड चैंपियनशिप' में भारत को पहला गोल्ड दिलाया है. भारत के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने नीलकंठ को इस उपलब्धि पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं.
Neelakantha Bhanu Prakash, एक एक्सीडेंट ने हैदराबाद के नीलकंठ को बना दिया दुनिया का सबसे तेज ‘ह्यूमन कैलकुलेटर’, पढ़ें पूरी कहानी

हैदराबाद के नीलकंठ भानु प्रकाश (Neelkantha bhanu prakash) ने हाल ही में लंदन में सबसे तेज मानव कैलकुलेटर (फास्टेस्ट ह्यूमन कैलकुलेटर) का टाइटल जीता है. नीलकंठ भानु प्रकाश दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज के ग्रेजुएट छात्र हैं.

महज 20 साल की उम्र में उन्होंने मेंटल कैलकुलेशन वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत को पहला गोल्ड दिलाया है. नीलकंठ का कहना है कि गणित “दिमाग का एक बड़ा खेल” है और वो “गणित के फोबिया को पूरी तरह मिटाना” चाहते हैं.

बता दें कि लंदन में होने वाली माइंड स्पोर्ट्स ओलंपियाड में इस साल नीलकंठ ने भाग लिया था और कैलकुलेटर से भी तेज डेसीमल के डिवीजन के सवाल चुटकियों में हल किए थे.

Neelakantha Bhanu Prakash, एक एक्सीडेंट ने हैदराबाद के नीलकंठ को बना दिया दुनिया का सबसे तेज ‘ह्यूमन कैलकुलेटर’, पढ़ें पूरी कहानी
File Pic- Neelakantha Bhanu Prakash

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नीलकंठ का कहना है कि उनकी तेज़ रफ्तार देखकर जज इतने चौंक गए थे, कि उनकी स्पीड के साथ सटीक जवाबों को क्रॉस चेक करने के लिए उन्होंने नीलकंठ से और ज़्यादा गणनाएं करवाईं.

नीलकंठ मूल रुप से हैदराबाद के रहने वाले हैं जहां उनके पिता केचअप की फैक्ट्री चलाते हैं और उसकी बहन फैशन इंडस्ट्री में है. इस प्रतियोगिता में 30 लोग शामिल हुए थे.

नीलकंठ का कहना है कि मेंटल कैलकुलेशन ज्यादा पॉपुलर नहीं है. हमारे पास श्रीनिवास रामानुजन और शकुंतला देवी हैं लेकिन मॉडर्न एरा में एक भी ऐसा नहीं है. भानु ने अब तक चार विश्व रिकॉर्ड और कई अन्य उपलब्धियां अपने नाम की हैं.

एक्सीडेंट की वजह से सिर में आ गईं थी चोटें

नीलकंठ ने अलग-अलग न्यूज एजेंसियों से बातचीत में बताया कि एक बार उनका एक्सीडेंट हुआ था जिसमें उनके सिर पर काफी चोटें आई थी. इसके कारण उन्हें एक साल तक स्कूल छोड़कर घर पर बैठे रहना पड़ा था और इसी दौरान नीलकंठ ने मेंटल कैलकुलेशन पर काफी समय बिताया. उन्होंने पहली ट्रॉफी 8 साल की उम्र में जीती थी.

नीलकंठ बच्‍चों को ऑनलाइन क्‍लासेज के जरिए पढ़ाते हैं और उनका सपना है कि वह एक विजन मैथ लैब बनाएं. इस लैब के जरिए वह हज़ारों बच्‍चों तक पहुंच बनाना चाहते हैं.

भारत के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने नीलकंठ की इस उपलब्धि पर बुधवार को बधाई दी थी.

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