NaMo के लिए US सरकार से भिड़ने वाली लड़ेगी राष्ट्रपति चुनाव

Share this on WhatsAppवॉशिंगटन अमेरिका के लोग कई परेशानियों का सामना कर रहे हैं. अब वक़्त आ गया है कि इनकी समस्याएं सुलझायी जाएं. ‘प्यार से नेतृत्व करो’ का नारा देने वाली अमेरिकी प्रांत हवाई की एकमात्र हिंदू सांसद तुलसी गबार्ड 2020 में होने वाला राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का मन बना रही हैं. सीएनएन से […]

वॉशिंगटन

अमेरिका के लोग कई परेशानियों का सामना कर रहे हैं. अब वक़्त आ गया है कि इनकी समस्याएं सुलझायी जाएं. ‘प्यार से नेतृत्व करो’ का नारा देने वाली अमेरिकी प्रांत हवाई की एकमात्र हिंदू सांसद तुलसी गबार्ड 2020 में होने वाला राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का मन बना रही हैं. सीएनएन से बातचीत के दौरान तुलसी गबार्ड ने कहा था कि उन्होंने अगला राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का फैसला लिया है. ऐसा फैसला लेने के पीछे बहुत से कारण हैं. हिन्दुओं के पवित्र ग्रन्थ गीता को हाथ में लेकर सांसद पद की शपथ लेने वाली तुलसी अगर आगामी राष्ट्रपति चुनाव लड़ती हैं और जीतती हैं तो वे अमेरिका की सबसे युवा राष्ट्रपति बन जाएंगी, जो कि इतिहास में पहली बार होगा.

विरासत में मिली राजनीति

37 वर्षीय तुलसी गबार्ड का जन्म 12 अप्रैल, 1981 को अमेरिका के समोवा में एक कैथोलिक परिवार में हुआ था. तुलसी की मां ईसाई हैं. तुलसी ने छोटे में ही हिंदू धर्म अपना लिया था. राजनीति तुलसी को विरासत में मिली. तुलसी के पिता हवाई सीनेट के सदस्य थे. तुलसी अमेरिका में सबसे युवा प्रतिनिधि बनने का इतिहास रच चुकी हैं. 2016 में तुलसी को डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी का उपाध्यक्ष बनाया गया था लेकिन बाद में उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. राजनीति के साथ-साथ तुलसी गबार्ड अमेरिकी सेना से भी जुड़ी हुई हैं. साल 2015 में उन्हें मेजर पद से प्रमोट किया गया था. तुलसी अमेरिकी सेना के लिए इराक, सीरिया जैसी जगहों पर तैनात रहकर अपनी सेवा दे चुकी हैं.

ये है वृंदावन कनेक्शन

तुलसी अक्सर भारत आती रहती हैं. हालांकि उनके माता-पिता दोनों ही भारतीय मूल के नहीं हैं. तुलसी की आस्था हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा है. तुलसी शाकाहारी हैं और वे हिंदू धर्म के हिसाब से ही अपने कार्य करती हैं. हिंदू धर्म में तुलसी की आस्था को देखते हुए अमेरिका में रह रहे भारतीय ही नहीं बल्कि भारत में रह रहे लोग भी उनका काफी समर्थन करते हैं. तुलसी को वृंदावन आना बहुत पसंद हैं. उन्होंने शादी भी हिंदू धर्म के रीति-रिवाज़ से की थी. तुलसी गबार्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिल चुकी हैं. अमेरिकी सरकार द्वारा जब पीएम मोदी पर 2002 गुजरात दंगों के चलते अमेरिका में प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था तो तुलसी गबार्ड उन नेताओं में से थीं, जिन्होंने सरकार के इस फैसले की कड़ी आलोचना की थी.