सचिन की ये फैन लगाती है धोनी की तरह लंबे-लंबे छक्‍के, T-20 वर्ल्‍ड कप में धमाल मचाएंगी 16 साल की रिचा घोष

रिचा ने साढ़े चार साल की उम्र में ही बल्ला थाम लिया था और अब, देश के लिए खेलने का उनका सपना जल्द ही पूरा होने वाला है.
Richa Ghosh included in Women World T20 squad, सचिन की ये फैन लगाती है धोनी की तरह लंबे-लंबे छक्‍के, T-20 वर्ल्‍ड कप में धमाल मचाएंगी 16 साल की रिचा घोष

आगामी महिला टी-20 विश्व कप के लिए 12 जनवरी को भारतीय टीम की घोषणा हो चुकी है. बल्लेबाज हरमनप्रीत कौर को टीम की कमान सौंपी गई है. कई युवा खिलाड़ियों के चयन ने लोगों को चौकाया है. 15 साल की शेफाली वर्मा पहले ही अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में अपना सिक्का जमा चुकीं है लेकिन विश्व कप टीम में जिस खिलाड़ी के सेलेक्‍शन ने सुर्खियां बटोरी वो है बंगाल की रिचा घोष.

सिलिगुड़ी की 16 साल की यह ऑलराउंडर अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय दौरा करने जा रहीं है, वह भी सीधे वर्ल्‍ड कप में. ये मौका उन्हें चैलेंजर ट्राफी में अच्छे प्रदर्शन की बदौलत मिला है. अपने पिता और बंगाल क्रिकेट संघ के अंशकालिक अंपायर मानवेंद्र घोष को देखकर रिचा ने साढ़े चार साल की उम्र में ही बैट थाम लिया था. अब देश के लिए खेलने का उनका सपना जल्द ही पूरा होने वाला है.

रिचा ने PTI से कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह सब इतनी जल्दी होगा. इस पर विश्वास करना मुश्किल है और मैं अब तक इस अहसास से उबर नहीं पाई हूं. उन्होंने कहा, ”मेरे पहले आदर्श हमेशा मेरे पिता रहे जिनसे मैंने क्रिकेट सीखा. इसके बाद सचिन तेंदुलकर जो हमेशा मेरे आदर्श रहेंगे.” जब छक्के जड़ने की बात आती है तो वह महेंद्र सिंह धोनी की फैन है.

धोनी की तरह लंबे छक्‍के लगाती हैं रिचा

रिचा खुद भी लंबे छक्के मारने के लिए जानी जाती हैं. उन्होंने बताया, “धोनी जिस तरह छक्के मारते हैं वह मुझे पसंद है और मैं भी ऐसा ही करने का प्रयास करती हूं. गेंदबाज चाहे कोई भी हो, जब आपके हाथ में बल्ला होता है तो आप कुछ भी कर सकते हो.”

रिचा को उनकी घरेलू टीम बंगाल में झूलन गोस्वामी और विकेटकीपर रिद्धिमान साहा जैसे सीनियर्स का साथ हमेशा मिलता रहा है. उन्होंने कहा, “झूलन दी ने हमेशा टीम में मेरा समर्थन किया जबकि रिद्धिमान (साहा) से मुझे हमेशा मदद मिली. वह व्यस्त रहते हैं लेकिन हम बात करते रहते हैं.”

क्रिकेट के प्रति रिचा के लगाव को देखकर पिता मानवेंद्र ने उन्हें स्‍थानीय बाघा जतिन क्लब में भेजना शुरू किया. उस वक्त वह क्लब में एकमात्र लड़की हुआ करती थीं. कड़ी मेहनत के बाद रिचा को 2012-13 में बंगाल की सीनियर टीम के शिविर में बुलाया गया. लगभग 7 साल बाद रिचा अपने सपनों को हकीकत बनते देखने जा रही हैं.

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