बाल विवाह और घरेलू हिंसा से लड़कर सेल्वी बनीं दक्षिण भारत की पहली कैब ड्राइवर

14 साल की उम्र में उसकी जबरदस्ती शादी कर दी गई थी. शादी के बाद की जिंदगी सेल्वी के लिए भयानक साबित हुई. सेल्वी को घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा. उसका पति उसे पैसे के लिए गलत काम करने को मजबूर करता था.

भारत में बाल विवाह (Child Marriage) ऐसी सामाजिक बुराई जो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है. कनाडा की प्रतिष्ठित डॉक्यूमेंट्री फिल्मकार एलिसा पालोस्ची ने इस बुराई को बड़ी ही बारीकी से अपने डॉक्यूमेंट्री driving with selvi में दिखाया है. डॉक्यूमेंट्री के निर्माता अब कई एनजीओ और शैक्षिक संस्थानों के साथ मिलकर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इस बात को पहुंचाने में लगे हैं.

सेल्वी दक्षिण भारत की पहली कैब ड्राइवर हैं. 14 साल की उम्र में उसकी जबरदस्ती शादी कर दी गई थी. शादी के बाद की जिंदगी सेल्वी के लिए भयानक साबित हुई. सेल्वी को घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा. उसका पति उसे पैसे के लिए गलत काम करने को मजबूर करता था. इससे तंग आकर सेल्वी ने जान देने का फैसला कर लिया.

हारी नहीं सेल्वी 

वह बीच सड़क पर खड़ी होकर किसी बस के आने का इंतजार कर रही थी ताकि उसके नीचे आकर वो अपनी जान दे सके. जब बस आई तो सेल्वी उसके नीचे न आकर, उस बस में सवार होकर मैसूर के ओडानाडी सेंटर चली गई. ओडानाडी सेंटर मानव तस्करी से छुड़ाए गए लोगों के पुनर्वासन के लिए काम करती है.

गांव की महिलाओं को देती हैं हिम्मत

यहां साल 2004 में वह कनाडा की प्रतिष्ठित डॉक्यूमेंट्री फिल्मकार एलिसा पालोस्ची से मिली. सेल्वी की कहानी यहां से शुरू होती है. जिसके बाद साल 2017 में एलिसा ने एक डॉक्यूमेंट्री driving with selvi बनाई. लोगों ने इस डॉक्यूमेंट्री की खूब तारीफ की.

आज सेल्वी कर्नाटक और तमिलनाडु के गांवों में जाकर महिलाओं को जीने की नई दिशा दिखाती हैं. वह उन्हें अपनी कहानी बताती है. उनके स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर बात करती हैं . सेल्वी कहती हैं कि आज भी कई लोग मानते हैं कि ड्राइविंग महिलाओं का काम नहीं है, लेकिन इसी ने मेरी जिंदगी को नई दिशा दी.

Related Posts