नौ साल की इस बच्‍ची को स्‍कूल में चिढ़ाते थे साथी, गुमनाम रहते हुए शिकायत कर सकें – बना डाली ऐसी एप

9 साल की मेइदइबहुन मजॉव ने ऐसा मोबाइल एप बनाया है जो गुमनाम तरीके से ऐसे मामलों की शिकायत करने की सुविधा देता है. यह एप्लिकेशन गूगल प्‍ले स्‍टोर पर जल्‍द उपलब्‍ध होगा.

साल 2017 में द टीचर फाउंडेशन और Wipro ने एक सर्वे किया था. इसमें पाया गया था कि भारत के स्‍कूलों में 42 प्रतिशत बच्‍चों को बुली (तंग) किया जाता है. बहुत बच्‍चे इससे टूट जाते हैं और उनके आत्‍मविश्‍वास को गहरा धक्‍का लगता है, मगर कुछ इसे चुनौती की तरह लेते हैं. इन्‍हीं में से एक हैं मेघालय की मेइदइबहुन मजॉव.

महज 9 साल की उम्र में मेइदइबहुन मजॉव ने ऐसा मोबाइल एप बनाया है जो गुमनाम तरीके से ऐसे मामलों की शिकायत करने की सुविधा देता है. कक्षा 4 में पढ़ने वाली मजॉव ने खुद बुलीइंग का शिकार होने के बाद, यह एप बनाने की ठानी. यह एप्लिकेशन गूगल प्‍ले स्‍टोर पर जल्‍द उपलब्‍ध होगा.

‘खोजती थी बुलीइंग से छुटकारा पाने के तरीके’

मजॉव के मुताबिक, “मुझे नर्सरी से स्‍कूल में तंग किया जाता रहा. इससे मुपर बहुत असर पड़ा. मुझे (बुलीइंग) इतनी नफरत थी कि मैं उससे छुटकारा पाने के तरीके खोजती थी. ऐसा किसी दूसरे बच्‍चे के साथ ना हो.”

मेइदइबहुन मजॉव ने PTI को बताया कि एक बार उनकी क्‍लास के स्‍टूडेंट्स ने एक ग्रुप बनाकर उनका बायकॉट किया. उनमें से एक तो मजॉव के पैरों पर चढ़ गया था. उन्‍होंने कहा कि उसके कई दोस्‍तों ने ऐसी परिस्थितियों का सामना किया है.

मेघालय के शिक्षा मंत्री लक्ष्‍मण रिंबुई ने मजॉब की खूब तारीफ की. उन्‍होंने उम्‍मीद जताई कि वह एक जिम्‍मेदार नागरिक बनेंगी.

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