टिकट होने के बावजूद ट्रेन में टॉयलेट के पास बैठकर आए थे JNU, पहले आदिवासी IPS और गांधी प्रेमी रॉबिन

रॉबिन पहले आदिवासी IPS होने के अलावा शायद पहले ऐसे पुलिस अफसर होंगे जिसके पास न खुद का घर है, न गाड़ी है. दो पहिया स्कूटर तक नहीं है. लकड़ी से बना एक घर था वह भी गांधी प्रेम में दान कर दिया.

देश हर साल 30 जनवरी को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि मनाता है. सत्य और अहिंसा के रास्ते पर जिंदगी भर चलने वाले गांधी जी से बहुत लोग प्रेरणा लेते हैं लेकिन सच्चे गांधी प्रेमी कुछ ही निकलते हैं. दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी रॉबिन हिबु ऐसे ही अनोखे गांधी प्रेमी हैं. अपने पद और रुतबे के अलावा रॉबिन की पहचान देश के पहले आदिवासी IPS के रूप में है.

रॉबिन हिबु के खाते में यूनाइटेड नेशन में रहने के अलावा दो राष्ट्रपति मेडल, प्रशस्ति पत्र और दर्जनों अवॉर्ड शामिल हैं. उन्होंने अपनी यात्रा के बारे में नवभारत टाइम्स को बताया कि कैसे उन्होंने नस्लीय भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और बुरे अनुभव से गुजरते हुए भी गांधी का रास्ता नहीं छोड़ा और वह हासिल किया जिसका लोग सपना देखते हैं.

रॉबिन पहले आदिवासी IPS होने के अलावा शायद पहले ऐसे पुलिस अफसर होंगे जिसके पास न खुद का घर है, न गाड़ी है. दो पहिया स्कूटर तक नहीं है. लकड़ी से बना एक घर था वह भी गांधी प्रेम में दान कर दिया.

Mahatma Gandhi fan IPS Robin Hibu, टिकट होने के बावजूद ट्रेन में टॉयलेट के पास बैठकर आए थे JNU, पहले आदिवासी IPS और गांधी प्रेमी रॉबिन

बेहद अभावों में बीता बचपन

अरुणाचल प्रदेश में घने जंगलों और पहाड़ों के बीच ‘होंग’ नाम का एक गांव है जो आज भी जीवन की बेसिक जरूरतों से दूर है. यहीं बसने वाली अपतानी जनजाति में रॉबिन हिबु का जन्म हुआ. पिता लकड़ी काटने का काम करते थे, मां घर संभालती थीं. रॉबिन के अलावा एक भाई और दो बहने हैं. लकड़ी काटने के अलावा उनका परिवार मछलियों के तालाब से गाद निकालने का काम करता था.

बेहद गरीबी में बचपन बीता, इसके बावजूद रॉबिन पढ़ने में बहुत तेज थे. उनका आदिवासी होना स्कूल में हमेशा परेशानी का कारण बना. भेदभाव और प्रताड़ना झेलकर बड़े होते रॉबिन की मुलाकात जब गांधी सेविका टीचर गुनी बाइडियो से हुई तो उनकी जिंदगी ही बदल गई. गुनी बाइडियो रॉबिन के गांव के पास कस्तूरबा गांधी सेवा आश्रम में पढ़ाती थीं.

ट्रेन में टॉयलेट के पास बैठकर आए जेएनयू

1991 में रॉबिन हिबु का एडमिशन दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हो गया तो वे पहली बार अपने गांव से निकलकर दिल्ली आए. उस दौर की घटना याद करते हुए रॉबिन बताते हैं कि ब्रह्मपुत्र मेल में बोगी नंबर 7 में 17 नंबर सीट उनकी थी. रात को उनके कंपार्टमेंट में फौजी चढ़े तो टिकट होने के बावजूद उनसे सीट खाली करा ली गई.

रॉबिन बताते हैं कि उन्हें अपशब्द कहकर टॉयलेट के पास पटक दिया गया. पूरा सफर टॉयलेट के पास करके स्टेशन पर पहुंचा, वहां से अरुणाचल प्रदेश भवन जाना था. पुलिस वाले ने उनके चेहरे की बनावट देखकर सवालों की झड़ी लगा दी और फिर डांटकर भगा दिया. अरुणाचल प्रदेश में कमरा नहीं मिला.

कोई ठिकाना नहीं मिलने पर सामान सहित बाहर बैठे रहे और रात को एक सब्जियों के गोदाम में जगह मिली जहां हर तरफ बोरे लगे हुए थे. वहां झाड़ू लगाकर, अखबार बिछाकर रॉबिन लेट गए. उसके बाद जेएनयू के नर्मदा हॉस्टल को ठिकाना बनाया. रॉबिन बताते हैं कि जेएनयू किसी गुरुकुल की तरह था.

Mahatma Gandhi fan IPS Robin Hibu, टिकट होने के बावजूद ट्रेन में टॉयलेट के पास बैठकर आए थे JNU, पहले आदिवासी IPS और गांधी प्रेमी रॉबिन

गांव में मां कर रहीं लोगों की सेवा

रॉबिन कहते हैं कि मां वहीं गांव में है. आठ कमरों का दो मंजिला लकड़ी का घर गांधी म्यूजियम को दे दिया गया है. जिसमें एक लाइब्रेरी है, एक कमरे में मां फ्री डिस्पेंसरी चलाती हैं और लोगों की सेवा करती हैं. म्यूजियम में बापू की चप्पल और चश्मा रखने हैं जिसका अप्रूवल राजघाट के गांधी म्यूजियम से मिल चुका है.

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