Ayodhya Judgment : बाबरी वाली जगह पर रामलला का अधिकार, मस्जिद के लिए मिलेगी दूसरी जगह

मुस्लिम पक्ष  को भी पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया गया है. सुन्नी वक्फ बोर्ड वहां मस्जिद बना सकता है. फैसले को लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) ने केंद्र सरकार को भी निर्देश दिए हैं.

अथ श्री अयोध्या कथा| 1885 में दायर हुआ था पहला मुकदमा, जानिए पूरी कहानी

निर्मोही अखाड़े के महंत रघबर दास ने चबूतरे को राम जन्म स्थान बताते हुए भारत सरकार और मोहम्मद असगर के खिलाफ सिविल कोर्ट में पहला मुक़दमा 29 जनवरी 1885 को दायर किया.

‘मानते हैं उस जगह पर श्री राम का जन्म हुआ, लेकिन हमें पूरी तरह बाहर न किया जाए’ मुस्लिम पक्ष ने रखी बात

सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील धवन ने यह भी कहा कि विवादित इमारत कोई त्याग दी गई मस्जिद नहीं थी.

‘सेवादार कह रहे हैं पहले मंदिर नहीं था, अगर मंदिर नहीं था तो आप सेवादार कैसे हुए’

जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि कई पुरानी मस्जिदों में संस्कृत में भी कुछ लिखा हुआ मिला है, वो कैसे?

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'गर्भगृह में 1939 में वहां पर मूर्ति नही थी वह पर बस एक फोटो थी. मूर्ति और गर्भगृह की पूजा का कोई सबूत नहीं है.'

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मामले की सुनवाई कर रही पीठ की अध्यक्षता कर रहे प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं.

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मध्यस्थता पैनल के गठन को दो महीने का वक्त पूरा हो गया है और उसने अपनी अपनी अंतरिम रिपोर्ट दाखिल कर दी है.