भोपाल गैसकांड: 36 साल बाद भी ताजा हैं जख्म, जेनेटिक डिसऑर्डर से ग्रस्त पीड़ितों की तीसरी पीढ़ी

सामाजिक संगठनों का कहना है कि इसे लेकर बड़े पैमाने पर स्टडी की जरूरत है. लेकिन सरकारें इसे लेकर उदासीन बनी हुई हैं.

भोपाल गैस पीड़ितों की लड़ाई लड़ते-लड़ते दुनिया से ही रुखसत हो गए अब्दुल जब्बार

करीब 35 साल पहले 27 वर्षीय जब्बार ने अपनी आंखों के सामने अपने अभिभावकों और भाई की मौत देखी थी. वह अपनी मां को गैस त्रासदी की रात शहर से 40 किलोमीटर दूर ले गए.

दुनिया की इन 8 तस्वीरों को देखकर पसीज गया दिल और भर आईं आंखें

सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों ने दिल दहला दिया था और इन्हें देख सभी के रौंगटे खड़े हो गए थे.

’20वीं सदी की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक है भोपाल गैस त्रासदी’

उस इलाके में अब भी जहरीले कण मौजूद हैं और हजारों पीड़ित तथा उनकी अगली पीढ़ियां सांस संबंधित बीमारियों से जूझ रही है तथा उनके अंदरुनी अंगों एवं प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचा है.