‘हम देखेंगे’: हिंदू या मुसलमान के खिलाफ नहीं, फैज की कलम ने तो इंकलाब के रंग भरे

फ़ैज़ और उनकी मशहूर नज़्म के साथ आज हो रहा है, अगर यही सोच चार सौ साल पहले कबीर के वक्त होती तो कबीर को भी थाने में बन्द कर दिया जाता, क्योंकि वे भी 'जो घर फूंके आपना चले हमारे साथ' का ऐलान कर रहे थे.