“बस 700 किलोमीटर और चलना है, दिन में छिपते हैं और रात में चलते हैं हम”

मजदूर ने कहा, "हम सभी चीजों का ध्यान रख रहें है और मास्क (Mask) पहनने के साथ ही हाथों को बार-बार धोते हैं. साथ ही रास्ते में मिले अन्य प्रवासी मजदूर (Migrant Workers), जो अपने घर लौट रहे थे, उनसे भी हमने कोई बातचीत नहीं की."