रवींद्रनाथ टैगोर की 159वीं जयंती: 8 साल में लिखी थी पहली कविता, जानें- कविगुरु की ये खास बातें

भारत (India) के 'जन गण मन' से लेकर बांग्लादेश (Bangladesh) के 'आमार सोना बांग्ला' और श्रीलंका (Sri Lanka) का राष्ट्रगान भी टैगोर की कविता पर आधारित है. गांधीजी ने टैगोर को 'गुरुदेव' की उपाधि दी थी.

बांका रसीला आम… जिस साल नहीं खाया, उस साल को ही उम्र से कम कर देना चाहिए

लॉकडाउन की मर्यादाओं का पालन करते हुए जितना भी हो सके आम का रस लीजिए. आम के इतिहास को समझिए. उसकी परंपरा से वाकिफ होइए. उसकी किस्मों को समझिए. जिंदगी में मिठास भरिए और जिंदगी में कितना भी खास होने के बावजूद 'आम' होने के जमीनी अहसास को बनाए रखिए.

वाशिंगटन में गूंजी रविंद्रनाथ टैगोर की ये कविता, क्या रहा संदेश

क्लाइमेट चेंज को लेकर आयोजित किए गए इस प्रदर्शन को नाम दिया गया 'द फायर ड्रिल फ्राइडे.' जोकर के नायक वाकीन फीनिक्स, मैगी जिलेनहॉल, सुजन सरांडो और मार्टिन शीन जैसी हस्तियां इस प्रदर्शन में शामिल हुईं.

27 दिसंबर 1911 : जब पहली बार गूंजा ‘जन गण मन’, पढ़ें रवींद्रनाथ टैगोर का गीत कैसे बना राष्‍ट्रगान

24 जनवरी, 1950 को प्रथम राष्‍ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने आधिकारिक रूप से 'जन गण मन' को राष्‍ट्रगान और 'वंदे मातरम' को राष्‍ट्रगीत घोषित किया.

इमरान खान ने टैगोर के Quote को खलील जिब्रान का बताकर किया ट्वीट, ट्विटर यूजर्स ने अक्ल ठिकाने लगा दी

एक महशूर पत्रकार ने इमरान खान के इस ट्वीट पर लिखा कि पता है आपको पीएम बनाने में व्हाट्सप्प का बड़ा हाथ है लेकिन गलत कंटेंट फॉरवर्ड मत कीजिए. जैसे की ये, जिसे काहिल जिब्रान ने नहीं बल्कि रवींद्रनाथ टैगोर ने कहा है.