मालिक की मौत से दुखी बंदर ने भी त्यागे प्राण, एक ही चिता में हुआ दाह संस्कार

मृत शिक्षक के भतीजे देवपाल ने बताया कि उनके चाचा ने इस बंदर को पाला था. उनके कोई औलाद नहीं थी, इसलिए बंदर को बेटे की तरह प्यार करते थे.