जूते की ‘जंग’ में ना कबीर का मान रखा, ना महिलाओं का सम्मान!

संत कबीर ने अंधविश्वास दूर करने के लिए अपने प्राण तक त्याग दिए थे. मगर, बीजेपी के माननीयों ने जूतों के ज़रिए संत कबीर की नगरी में जो कुछ किया, उसके बाद पार्टी को इस पर विचार करना चाहिए कि ‘चाल, चेहरा और चरित्र’ के साथ ‘चरण पादुका’ भी जुड़...