व्यंग्य: बजट के ‘हलवे’ से याद आया… #चेंजयोरमाइंडसेट #इंट्रोड्यूसन्यूग्रोथरेट

सरकार बगैर देर किए राष्ट्रवाद, हिंदुत्व और पाकिस्तान सरीखे कुछ नए सूचकांक जेनरेट करे. अगर राहुल बाबा कह सकते हैं कि गरीबी तो बस मन की अवस्था है, तो देशवासियों के दिमाग में उन्नत और उर्वर हो रहे राष्ट्रवाद को मन की एक बड़ी सकारात्मक अवस्था क्यों न माना जाए?