जानें मोहर्रम और उसका इतिहास, क्या है ताजिया और कर्बला की जंग?

इसी दिन हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला में अपने 72 साथियों के साथ शहादत दी थी. इस्लाम में इस दिन को शोक के तौर पर मनाया जाता है. इसलिए मोहर्रम (Muharram) के इस माह को गम के महीने के तौर पर मनाया जाता है.