Amazon, Flipkart पर शॅापिंग करना हुआ मंहगा, देर से होगी प्रोडक्ट्स की डिलिवरी

नई दिल्ली: एफडीआई निवेश वाली ई-कॅामर्स कंपनियों के लिए नए नियम लागू होने के बाद अब Amazon और Flipkart जैसी ई-कॅामर्स वेबसाइट्स की मुश्किलें बढ़ गई हैं. नए नियमों के लागू होने के बाद अब ई-कॉमर्स कंपनियां उन कंपनियों के प्रॉडक्ट्स नहीं बेच पाएंगे, जिनमें उनकी हिस्सेदारी है. इसके अलावा अब किसी प्रॉडक्ट की एक्सक्लूसिव […]

नई दिल्ली: एफडीआई निवेश वाली ई-कॅामर्स कंपनियों के लिए नए नियम लागू होने के बाद अब Amazon और Flipkart जैसी ई-कॅामर्स वेबसाइट्स की मुश्किलें बढ़ गई हैं. नए नियमों के लागू होने के बाद अब ई-कॉमर्स कंपनियां उन कंपनियों के प्रॉडक्ट्स नहीं बेच पाएंगे, जिनमें उनकी हिस्सेदारी है. इसके अलावा अब किसी प्रॉडक्ट की एक्सक्लूसिव सेल भी नहीं चल पाएगी.

सरकार ने इस पर साफ कर दिया है कि इन कंपनियों को एफडीआई के नियमों का पालन करना ही होगा. सरकार ने पिछले साल दिसंबर में ई-कॉमर्स क्षेत्र में नए नियमों की घोषणा की थी और इन्हें 1 फरवरी से लागू किया जाना तय किया गया था. माना जा रहा है कि इन नए नियमों से सबसे ज्यादा असर अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों के कारोबार पर होगा.

क्या थी Amazon-Flipkart की दलील?

एफडीआई निवेश लेने वाली ई-कॉमर्स कंपनियों की दलील थी कि उनकी सहयोगी कंपनियों के पास करीब 6 हज़ार करोड़ रुपये का माल है जिसकी बिक्री एक महीने में कर पाना संभव नहीं होगा. इसकी वजह से उन्हें भारी घाटा उठाना पड़ेगा इसलिए सरकार नियमों को लागू करने की समय सीमा 6 महीने तक बढ़ा दे लेकिन सरकार ने इस प्रकार की कोई भी राहत देने से मना कर दिया है.

सरकार ने पिछले साल 26 दिसंबर को सफाई जारी कर ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए सख्ती बढ़ा दी थी. घरेलू कारोबारियों का आरोप था कि ई-कॉमर्स कंपनियां विदेशी फंडिंग के दाम पर भारी डिस्काउंट देती हैं. साथ ही सप्लायर्स पर भी दबाव बनाकर कीमतों को प्रभावित करती हैं जिससे छोटे कारोबारियों को नुकसान हो रहा है.