ऑनलाइन शॉपिंग में सावधानी हटी दुर्घटना घटी, ऐसे बचें जालसाजों से

किसी दूसरे के मोबाइल या लैपटॉप से शॉपिंग कर रहे हैं और ऑनलाइन पेमेंट करने जा रहे हैं तो कार्ड डिटेल्स सेव न करें. भविष्य में आपकी जानकारी का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है.

नई दिल्ली: हर पीली चीज सोना नहीं होती. यह बात हम बचपन से सुनते आये हैं लेकिन अमल करना भूल जाते हैं. ऐसा ही किस्सा मेरी एक दोस्त से जुड़ा है. दरअसल जब से नोटबंदी हुई मेरी दोस्त ने कैश रखना बंद कर दिया है. कैश न रखने का बड़ा बहाना यह भी है कि अब हर चीज तो ऑनलाइन मिल जाती है. वो ऑनलाइन ही चीजें खरीदती है और पेमेंट करती है. ठीक भी है, ऑनलाइन शॉपिंग से आपकी मेहनत और समय दोनों बच जाते हैं. मगर अति हर चीज की बुरी होती है.

हुआ कुछ यूं कि मेरी दोस्त ने बिना जांचे परखे एक वेबसाइट से कुछ सामान खरीदा और पेमेंट भी कर दी. बताई गई तारीख के हिसाब से जब सामान पहुंचने में देर हुई तो उसने वेबसाइट पर बताए फोन नंबर पर बात करने की कोशिश की. हुआ वही जो नहीं होना चाहिए था. नंबर बंद जा रहा था. थोड़ा और छानबीन की तो पता चला वेबसाइट पर लास्ट अपडेट दो साल पहले हुई थी. लेकिन अब देर हो चुकी थी, मेरी दोस्त के पैसे डूब चुके थे. मेरी दोस्त जैसा हाल आपका न हो, इसके कुछ तरीके हैं जो आपको ऑनलाइन जालसाजों से बचा सकते हैं…

• हो सके तो किसी भरोसेमंद ई-कॉमर्स वेबसाइट से ही खरीददारी करें. इन वेबसाइट की मर्चेंट सर्विस और चीजें दोनों ही विश्वसनीय होते हैं.
• अगर किसी नई वेबसाइट से कुछ खरीद रहे हैं तो ऑनलाइन पेमेंट न करें. ऐसे में सबसे सही विकल्प कैश ऑन डिलीवरी ही होता है.
• कंपनी की रिटर्न पॉलिसी ठीक तरह से पढ़ लें. कभी-कभी ऐसा भी होता है कि आर्डर किया सामान आप तक पहुंचता तो है, पर जब आप पैकिंग खोलते हैं तो जो सामान आपके हाथ लगता है वो खराब क्वालिटी का निकल जाता है. इसके बाद आप सामान लौटाना भी चाहें तो कंपनी पॉलिसी का हवाला देकर आपको टाल दिया जाता है.
• सस्ती सेल से जुड़े लुभावने ऑफर जिनमें 1 रुपए में 32 जीबी पेनड्राइव, 2 रुपए में रेडमी फोन और 5 रुपए में पीटर इंग्लैंड की जैकेट बेचने जैसे दावे किए जा रहे हैं, सिर्फ और सिर्फ झूठी होती हैं. सेल लगती है ये बात सच है, लेकिन इतनी सस्ती नहीं कि कंपनी खुद बिक जाए. ये फेक ऑफर वाली वेबसाइट यूजर का डाटा चोरी करती हैं और उनके सिस्टम को नुकसान भी पहुंचाती हैं.
• ऐसी कोई भी वेबसाइट जिसके यूआरएल में https:// की बजाय सिर्फ http:// लगा होता है, सुरक्षित नहीं होती हैं. यहां पर s का मतलब सिक्योरिटी से है. उदाहरण के तौर पर फेसबुक सुरक्षित है क्योंकि इसका लिंक https://facebook.com है.
• किसी दूसरे के मोबाइल या लैपटॉप से शॉपिंग कर रहे हैं और ऑनलाइन पेमेंट करने जा रहे हैं तो कार्ड डिटेल्स सेव न करें. भविष्य में आपकी जानकारी का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है.

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